मालिक की अनुमति बिना निर्माण करने पर किरायेदार को संपत्ति का कब्जा लौटाना होगा: गुजरात हाईकोर्ट

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गुजरात हाईकोर्ट ने किरायेदार और मकान मालिक से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई किरायेदार ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट (टीपी एक्ट) की धारा 108 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है और मकान मालिक की लिखित अनुमति के बिना स्थायी निर्माण करता है, तो मकान मालिक को विवादित संपत्ति की मूल स्थिति वापस पाने का अधिकार होगा।

जस्टिस जे.सी. दोशी ने अपने निर्णय में कहा कि रेंट एक्ट की धारा 23 के तहत किरायेदार अपने खर्च पर बिजली कनेक्शन लेने का हकदार है, लेकिन इसके अलावा वह मकान मालिक की सहमति के बिना कोई स्थायी ढांचा या निर्माण नहीं कर सकता। ऐसा करना किरायेदारी की शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। कोर्ट ने वर्षों से गोदाम की संपत्ति किराए पर रखे किरायेदार को चार सप्ताह के भीतर संपत्ति का शांतिपूर्ण और खाली कब्जा मकान मालिक को सौंपने का आदेश दिया है।

इस मामले में हाईकोर्ट ने किरायेदार की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और निचली अपीलीय अदालत के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर माना कि किरायेदार ने लंबे समय तक संपत्ति का उपयोग करने के इरादे से मकान मालिक की अनुमति के बिना पक्की दीवार का निर्माण किया था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किरायेदार का इरादा साफ होता तो वह अस्थायी सामग्री से पार्टिशन दीवार बनाता, लेकिन ईंट और सीमेंट से बनाई गई पक्की दीवार से उसका इरादा स्पष्ट होता है। ऐसे में किरायेदार द्वारा किया गया निर्माण किरायेदारी की शर्तों का गंभीर उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया कि किरायेदार चार सप्ताह के भीतर संपत्ति का कब्जा मकान मालिक को सौंपे।

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Author: sajagkutch

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