अमेरिका द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ का सीधा असर गुजरात के डेनिम उद्योग पर पड़ा है। वर्षों से अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहे डेनिम निर्माता अब बदलती परिस्थितियों में खुद को टिकाए रखने के लिए अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करने को मजबूर हो गए हैं। बढ़े हुए टैरिफ के कारण न केवल भारतीय डेनिम महंगा हो गया है, बल्कि पुराने और मजबूत व्यापारिक संबंध भी कमजोर पड़ गए हैं।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका में भारतीय डेनिम पर अब करीब 50 प्रतिशत तक कुल टैरिफ लग रहा है। इसमें बेसलाइन ड्यूटी के साथ वर्ष 2025 में भू-राजनीतिक कारणों से लगाए गए अतिरिक्त शुल्क भी शामिल हैं। इस वजह से भारतीय डेनिम बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में महंगा हो गया है। पहले अमेरिका भारतीय मिलों और निर्यातकों के लिए एक बड़ा और भरोसेमंद बाजार था, जहां बड़े ऑर्डर और स्थिर मुनाफा मिलता था, लेकिन अब यह समीकरण पूरी तरह बदल चुका है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल से अगस्त के दौरान अमेरिका को 49.68 लाख वर्ग मीटर डेनिम का निर्यात हुआ था। वहीं 2025-26 की इसी अवधि में यह घटकर सिर्फ 2.47 लाख वर्ग मीटर रह गया। यानी सालाना आधार पर डेनिम निर्यात में लगभग 86 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
निर्यात घटने के बाद गुजरात की डेनिम मिलें अब घरेलू बाजार की ओर ज्यादा रुख कर रही हैं। भारत में इस समय फास्ट फैशन और किफायती ब्रांड्स का बोलबाला है। जूडियो, स्टाइल अप और रिलायंस रिटेल जैसे ब्रांड्स बड़ी मात्रा में डेनिम खरीद रहे हैं, लेकिन कपड़े की कीमतों पर काफी दबाव भी बना रहे हैं। इससे उत्पादकों का मुनाफा कम हो गया है और डेनिम कारोबार अब तेज रफ्तार लेकिन कम मार्जिन वाला बनता जा रहा है।
फैशन ट्रेंड तेजी से बदलने और सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते जोखिम भी बढ़ गया है। फिलहाल लूज और बैगी फिटिंग की मांग ज्यादा है, लेकिन यह ट्रेंड कब बदल जाए, कहना मुश्किल है। इसी कारण उत्पादक अब ज्यादा स्टॉक रखने से बच रहे हैं। पहले जहां 30 दिनों का स्टॉक रखा जाता था, अब उसे घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, वैश्विक बाजार में डेनिम की कुल मांग बढ़ रही है और गुजरात के डेनिम उत्पादक इस समय 75 से 80 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स अब भारत से रेडीमेड गारमेंट्स मंगवा रहे हैं, जो उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि निर्यात सीमित होने, घरेलू बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लंबा होता पेमेंट साइकिल डेनिम उद्योग के लिए नई चुनौतियां बनकर सामने आ रही हैं। ऐसे में बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति अपनाना अब उद्योग की मजबूरी बन गया है।
