म्यांमार से सुरक्षित भविष्य की तलाश में समुद्री रास्ते से पलायन कर रहे रोहिंग्या शरणार्थियों पर एक भीषण त्रासदी टूट पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर जा रही दो नावें डूब गईं, जिनमें सवार 500 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे ने दुनिया के सबसे गंभीर शरणार्थी संकटों में से एक की भयावह तस्वीर फिर सामने ला दी है।
बताया जा रहा है कि दोनों नावें जून के अंतिम सप्ताह में म्यांमार के राखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। इनमें बड़ी संख्या में रोहिंग्या परिवारों के साथ महिलाएं और बच्चे भी सवार थे। एक नाव रवाना होने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास म्यांमार के तट के निकट समुद्र में डूबने की आशंका है। फिलहाल राहत एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि रोहिंग्या समुदाय लगातार हिंसा, भुखमरी और असुरक्षा से बचने के लिए जान जोखिम में डालकर समुद्री यात्रा करने को मजबूर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से खोज एवं बचाव अभियानों को मजबूत करने और शरणार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार में जारी संघर्ष, बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में बिगड़ती परिस्थितियां और मानवीय सहायता में कमी के कारण हजारों रोहिंग्या खतरनाक समुद्री मार्ग अपनाने को विवश हैं। यह हादसा एक बार फिर वैश्विक समुदाय के सामने रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षा और मानवीय सहायता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
