आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भारतीय चिकित्सा प्रणाली राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) जैसे नियामक निकायों के माध्यम से विभिन्न उपाय किए हैं। ये निकाय क्रमशः भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग अधिनियम, 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 के तहत स्थापित किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में उठाए गए प्रमुख कदम अनुलग्नक के रूप में दिए गए हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य का विषय होने के कारण, नए आयुष शिक्षण संस्थानों की स्थापना की प्राथमिक जिम्मेदारी उत्तराखंड सहित सम्बंधित राज्य सरकारों के दायरे में आती है। सरकारी क्षेत्र में आयुष शिक्षण संस्थानों की अपर्याप्त उपलब्धता की स्थिति में राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। तदनुसार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एनएएम दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) के माध्यम से उपयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करके वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, उत्तराखंड राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एसएएपी के माध्यम से नए आयुष शिक्षण संस्थान की स्थापना के लिए कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया है।
केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), एक स्वायत्त संगठन, उत्तराखंड में अपनी सहायक इकाई, रानीखेत (तारीखेत) में स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) के माध्यम से एक महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र संचालित करता है। वर्तमान में, उत्तराखंड में किसी नए अनुसंधान संस्थान की स्थापना का कोई प्रस्ताव नहीं है।
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