गुजरात में निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी लगातार गंभीर होती जा रही है। वर्ष 2025 में साइबर ठगों ने निवेश के नाम पर करीब 565 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। जनवरी से नवंबर 2025 के बीच नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर 13,122 निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज किए गए। मई 2025 में एक करोड़ से अधिक पंजीकृत निवेशकों का आंकड़ा पार कर भारत का तीसरा राज्य बनने वाला गुजरात अब इन्वेस्टमेंट साइबर फ्रॉड का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
साइबर क्राइम के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में ऑनलाइन ठगी की 37 अलग-अलग कैटेगरी दर्ज की गई हैं, जिनमें निवेश से जुड़े घोटाले सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुल 1.61 लाख साइबर शिकायतों में नागरिकों ने 1,334.06 करोड़ रुपये गंवाए, जिसमें से लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा केवल निवेश धोखाधड़ी का है। अधिकारियों के मुताबिक, निवेश से जुड़े मामलों में पीड़ितों की संख्या भले कम हो, लेकिन ठग पीड़ितों से एक साथ लाखों रुपये निवेश करवा लेते हैं, जिससे नुकसान भारी हो जाता है।
???? कौन बन रहा है शिकार
इन घोटालों का शिकार सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि उद्योगपति, कॉरपोरेट एक्जीक्यूटिव, डॉक्टर और शिक्षित वर्ग भी हो रहा है। एक मामले में उत्तर भारत की एक महिला को एक लोकप्रिय ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से मिलते-जुलते नाम वाले ग्रुप में जोड़ा गया। महिला ने 4 लाख रुपये का निवेश किया, लेकिन यूके में रह रही उसकी बेटी ने समय रहते इसे फर्जी बताया। जब महिला ने पैसा निकालने की कोशिश की, तो उसे केवल 2 लाख रुपये ही वापस मिल सके।
???? शिकायतों का विश्लेषण
1.61 लाख शिकायतों के विश्लेषण से सामने आया है कि गुजरात में प्रति शिकायत औसतन 82,884 रुपये का नुकसान हुआ है। हालांकि, ठगी के प्रकार के अनुसार यह औसत नुकसान काफी अलग-अलग रहा है। कुछ फ्रॉड बड़े पैमाने पर लोगों को फंसाने के लिए किए गए, जबकि कुछ मामलों में कम लोगों से बड़ी रकम वसूली गई।
⚠️ ठगी के प्रमुख प्रकार और नुकसान
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डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: सबसे ज्यादा नुकसान इसी श्रेणी में हुआ। ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डराते थे। इसमें प्रति केस औसतन 15.46 लाख रुपये की ठगी हुई।
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निवेश घोटाले: दूसरे नंबर पर रहे, जिनमें औसतन 4.34 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
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वीजा फ्रॉड: 318 मामलों में औसतन 3.34 लाख रुपये की ठगी, फर्जी नौकरी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर धोखा।
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बीमा और टास्क फ्रॉड: बीमा फ्रॉड में 1.83 लाख और टास्क फ्रॉड में 1.58 लाख रुपये का औसत नुकसान।
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कूरियर और RTO चालान फ्रॉड: कूरियर फ्रॉड के सिर्फ 14 मामले दर्ज हुए, जबकि RTO चालान के नाम पर 794 मामलों में 5.69 करोड़ रुपये की ठगी हुई।
???? बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण में मोबाइल नंबर अनिवार्य होने और तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण के कारण ठगों के लिए लोगों को निशाना बनाना आसान हो गया है। ऐसे में नागरिकों को किसी भी अनजान निवेश योजना, ऑनलाइन ग्रुप या कॉल पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहने की जरूरत है।
