इंडिगो की उड़ानें रद्द, निवेशकों पर भी असर: छह दिनों में शेयर में तेज गिरावट से बाजार में चिंता

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निवेशकों के लिए यह चेतावनी बेहद गंभीर है। आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपके शेयर ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट का किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि के लिए दुरुपयोग तो नहीं हो रहा। हाल ही में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को उजागर कर दिया है, जिसमें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक वरिष्ठ डॉक्टर पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जांच में पाया गया कि उनके ट्रेडिंग अकाउंट का इस्तेमाल शेयरों के दाम कृत्रिम रूप से बढ़ाने और प्रमोशन के लिए ‘सर्कुलर ट्रेडिंग’ में किया गया था।

सर्कुलर ट्रेडिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें एक ही समूह आपस में बार-बार शेयरों की खरीद-बिक्री करता है, जिससे बाजार में फर्जी वॉल्यूम और झूठी तेजी दिखाई देती है। कई बार ऐसे निवेशक, जिन्हें शेयर बाजार की गहरी समझ नहीं होती, अपने अकाउंट का संचालन किसी परिचित व्यक्ति, एजेंट या ब्रोकर को सौंप देते हैं। यह व्यवस्था अक्सर अनौपचारिक और गैरकानूनी होती है, क्योंकि ऐसे लोगों के पास दूसरों के पैसों का प्रबंधन करने का वैध लाइसेंस नहीं होता।

सेबी की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छोटे ब्रोकर अलिक्विड शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम बनाने के लिए अपने ग्राहकों के खातों का दुरुपयोग करते हैं। जब ऐसे सौदे नुकसानदायक या अवैध साबित होते हैं, तब उसकी पूरी जिम्मेदारी खाताधारक पर आ जाती है। कई मामलों में ग्राहक यह दावा करते हैं कि सौदे उनके वित्तीय सलाहकार ने किए थे, लेकिन नियामक संस्थाएं यह मानती हैं कि खाताधारक की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने अकाउंट की गतिविधियों पर नजर रखे।

अक्सर फोन कॉल या ई-मेल के जरिए क्लाइंट से केवल ‘कन्फर्मेशन’ ले लिया जाता है, जबकि वास्तविक ट्रेडिंग की जानकारी रिकॉर्ड में नहीं होती। जांच शुरू होने के बाद बातचीत के रिकॉर्ड तैयार करने जैसे मामले भी सामने आए हैं। यही कारण है कि कई निवेशक अनजाने में कानूनी पचड़े में फंस जाते हैं।

यदि कोई निवेशक चाहता है कि उसका पैसा कोई तीसरा पक्ष मैनेज करे, तो उसके लिए म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) जैसे वैध और लाइसेंस प्राप्त विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, इनमें न्यूनतम निवेश राशि अधिक होती है, जिस कारण कई लोग ज्यादा रिटर्न के लालच में स्थानीय या परिचित ब्रोकरों के झांसे में आ जाते हैं।

कई बार आकर्षक योजनाओं के नाम पर निवेशकों से कहा जाता है कि मुनाफे का एक हिस्सा देने पर उनका पैसा बेहतर तरीके से लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में जोखिम अत्यधिक होता है। एक उदाहरण में, एक निवेशक जिसने कभी ट्रेडिंग नहीं की थी, ऑप्शन ट्रेडिंग से नियमित आय के लालच में फंस गया और अंततः उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा।

सेबी ने दिसंबर 2018 से ट्रेडिंग ऐप्स पर दो-स्तरीय प्रमाणीकरण अनिवार्य किया है, ताकि थर्ड पार्टी ट्रेडिंग को रोका जा सके। इसके बावजूद, पूरी सुरक्षा तभी संभव है जब निवेशक स्वयं अपने अकाउंट की निगरानी करें।

इस पूरी स्थिति का निष्कर्ष साफ है—खुद जागरूक रहकर ट्रेडिंग करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। किसी और के भरोसे आपके अकाउंट से कमाई होगी, इस सोच में जोखिम बहुत अधिक है और नुकसान की पूरी जिम्मेदारी अंततः खाताधारक को ही उठानी पड़ती है।

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Author: sajagkutch

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