भारत-EU ट्रेड डील से बांग्लादेश की मुश्किलें बढ़ीं, अरबों डॉलर के व्यापार को मिलेगा चुनौतीपूर्ण सामना

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) 27 जनवरी 2026 को अंतिम रूप पा गया। इस महत्वपूर्ण व्यापार करार को “सब सौदों का माँ” कहा गया है, क्योंकि यह लगभग 93 % भारतीय सामान और 90 % EU सामान पर करों को समाप्त या काफी कम कर देगा और 2031 तक दोनों के बीच व्यापार को करीब 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का अनुमान है।

इस करार का सबसे बड़ा असर बांग्लादेश जैसे देशों पर हो सकता है, जो अब तक EU के विशाल कपड़ा बाजार का बड़ा हिस्सा अपने नाम कर पाए हैं। बांग्लादेश, एक कम विकसित देश (Least Developed Country – LDC) होने के कारण, यूरोपियन बाजार में अपने वस्त्र उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क का लाभ उठाता आया है और उसने लगभग 30 बिलियन डॉलर का व्यापार हासिल किया है, जबकि भारत की कपड़ा तथा वस्त्र निर्यात सिर्फ लगभग 7 बिलियन डॉलर है और उस पर लगभग 12 % शुल्क लगता था।

अब FTA लागू होने के बाद भारत भी कपड़ा तथा टेक्सटाइल माल पर शून्य शुल्क का लाभ पाकर यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज कर सकता है। इस बदलाव से बांग्लादेश को अपने प्रमुख निर्यात बाजार में भारतीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिससे उसके व्यापार और रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के अनुसार, यह समझौता भारतीय कपड़ा उद्योग को आज के लगभग 7 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 30-40 बिलियन डॉलर तक निर्यात बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे करोड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

संक्षेप में, यह मुक्त व्यापार समझौता भारत और EU के व्यापार को बड़े स्तर पर खोल रहा है, लेकिन इसी के कारण बांग्लादेश जैसे देशों के लिए व्यापारिक दबाव और चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं।

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Author: sajagkutch

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