दुनियाभर में जहां ईद-उल-फितर का त्योहार खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है, वहीं इस बार खाड़ी देशों में माहौल काफी अलग और चिंताजनक देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई देशों में ईद का त्योहार डर और अनिश्चितता के माहौल में मनाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार कतर, कुवैत और यूएई जैसे देशों में सुरक्षा कारणों से लोगों को खुले स्थानों पर नमाज अदा करने से रोका गया। प्रशासन को आशंका थी कि किसी भी समय मिसाइल या ड्रोन हमले हो सकते हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर सख्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए।
ईद के मौके पर आमतौर पर मस्जिदों और सार्वजनिक स्थलों पर भारी भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कई जगहों पर सन्नाटा पसरा रहा। खासकर येरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद में भी लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण वहां का माहौल भी सामान्य नहीं रहा।
इस पूरे हालात की वजह क्षेत्र में चल रहा सैन्य संघर्ष है, जिसने आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर डाला है। लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है, जिससे त्योहार की खुशियां फीकी पड़ गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव इसी तरह बना रहा, तो इसका असर केवल सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर भी पड़ता रहेगा। इस बार की ईद ने यह साफ कर दिया है कि युद्ध और संघर्ष का प्रभाव आम लोगों के त्योहारों तक पहुंच जाता है।
