प्रख्यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 17वें दिन में प्रवेश कर गया। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत में तेजी से गिरावट आई है, जिससे समर्थकों, चिकित्सकों और कई सार्वजनिक हस्तियों की चिंता बढ़ गई है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी इस आंदोलन में सोनम वांगचुक कथित परीक्षा अनियमितताओं और NEET परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।
डॉक्टरों के अनुसार लगातार उपवास के चलते सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सार्थक संवाद शुरू नहीं होता, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
इस बीच देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। कई विपक्षी नेताओं, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने भी सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की अपील की है। हालांकि उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने का भी आग्रह किया है।
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा है। उन्होंने केंद्र सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। फिलहाल पूरे देश की नजर इस आंदोलन और सरकार की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
