भावनगर में भगवान जगन्नाथजी की 41वीं भव्य रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। सुबह से ही मंदिर परिसर और रथयात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सुसज्जित रथों में विराजमान कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। रथयात्रा के दौरान पूरे शहर में ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
रथयात्रा शुरू होने से पहले पारंपरिक पहिंद विधि विधिवत संपन्न की गई। इसके बाद सजे-धजे रथ निर्धारित मार्ग से आगे बढ़े, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुष्पवर्षा की और प्रसाद ग्रहण किया। यात्रा में धार्मिक झांकियां, भजन-कीर्तन, पारंपरिक बैंड, अखाड़ों के हैरतअंगेज प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
रथयात्रा के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने भगवान का स्वागत किया और जगह-जगह सेवा शिविर, जल वितरण तथा प्रसाद की व्यवस्था की गई। यात्रा में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। पुलिस बल, ट्रैफिक पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती के साथ रथयात्रा मार्ग पर निगरानी रखी गई, ताकि पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान जगन्नाथजी की रथयात्रा ने भावनगर में धार्मिक एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक परंपराओं का भव्य संदेश दिया। श्रद्धा और उत्साह से सराबोर इस आयोजन ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया।
