आज लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार, केरल की अनुसूचित जनजातियों (एसटी) की जनसंख्या 4,84,839 है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 1.45 प्रतिशत है। सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले वायनाड, इडुक्की, पलक्कड़, कासरगोड और कन्नूर हैं।
अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 को संबंधित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों द्वारा क्रियान्वित (लागू) किया जाता है, जबकि जनजातीय कार्य मंत्रालय उनसे प्राप्त मासिक प्रगति रिपोर्टों के माध्यम से इसके कार्यान्वयन की निगरानी करता है। जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) के अनुसार, इस अधिनियम के तहत 2,923 व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर) पट्टे एवं 110 सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) पट्टे, कुल मिलाकर 3033 वन अधिकार पट्टे बांटे गए हैं।
सरकार, केरल के निवासियों सहित, अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास को उच्च प्राथमिकता देती है। भूमि अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका से संबंधित मुद्दों का समाधान वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा लागू राज्य कानूनों के तहत भूमि अलगाव (हस्तांतरण) से संबंधित मुद्दों का निपटान किया जाता है, जबकि स्वास्थ्य और पोषण संबंधी उपायों (हस्तक्षेपों) को केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत अभिसरण के माध्यम से क्रियान्वित (लागू) किया जाता है।
जनजातीय उप-योजना और अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत केरल सरकार को जारी की गई निधियों का वर्ष-वार ब्यौराः
अनुसूचित जनजातियों की सतत आजीविका को बढ़ावा देता है, जिसमें लघु वनोपज तथा अन्य जनजातीय उत्पादों पर आधारित मूल्य श्रृंखलाओं पर विशेष बल दिया जाता है।
जनजातीय अनुसंधान, सूचना, शिक्षा, संचार एवं कार्यक्रम (टीआरआई-ईसीई): यह योजना जनजातीय संस्कृति के अनुसंधान, प्रलेखन, क्षमता निर्माण, संरक्षण एवं संवर्धन, जागरूकता सृजन, सूचना प्रसार तथा साक्ष्य-आधारित नीति समर्थन हेतु जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता प्रदान करती है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी): जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत यह एक शीर्ष संगठन है, जिसकी स्थापना विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास हेतु की गई है और यह आजीविका सृजन के लिए विभिन्न योजनाओं को कार्यान्वित करता है। एनएसटीएफडीसी पात्र अनुसूचित जनजाति समुदायों को रियायती ऋण प्रदान करता है।
अनुसूचित जनजातियों हेतु उद्यम पूंजी निधि (वीसीएफ-एसटी): यह योजना आय-सृजनकारी उद्यमों की स्थापना एवं विस्तार हेतु अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को रियायती उद्यम पूंजी सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है।
मंत्रालयों/विभागों और केरल सरकार के साथ अभिसरण के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी ढांचे को सदृढ़ करना।
