एडमिरल संजय वात्स्यायन, एफओसी-इन-सी (डब्ल्यूएनसी) द्वारा प्रोजेक्ट सीबर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर का उद्घाटन

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वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी नौसेना कमान ने 15 अक्टूबर 2026 को नौसेना बेस, कारवार में प्रोजेक्ट सीबर्ड चरण आईआईए के हिस्से के रूप में ट्रंक यूटिलिटी और एक्सेस इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ भारतीय नौसेना और स्टेशन स्वास्थ्य संगठन के रक्षा नागरिकों के लिए आवासीय आवास का उद्घाटन किया। इस अवसर पर वाइस एडमिरल विवेक दहिया, महानिदेशक सीबर्ड और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

उद्घाटन की गई आवासीय और अस्पताल सुविधाओं में नौसेना रक्षा नागरिकों के लिए 300 आवासीय इकाइयों के पांच टावर और स्टेशन स्वास्थ्य संगठन परिसर शामिल हैं, जो मौजूदा अस्पताल, आईएनएचएस पतंजलि को 409 बिस्तरों की क्षमता में बढ़ाने के हिस्से के रूप में है। ये दो लाख लीटर पहाड़ी पर पानी के जलाशय और एक सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) द्वारा समर्थित हैं।

कारवार नौसेना बेस के निरंतर विस्तार को देखते हुए स्वच्छ पर्यावरण मानकों के अनुपालन और सुगम आवागमन सुविधाओं को और सुदृढ़ करना आवश्यक है। इस दिशा में आधुनिक एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा तथा प्रवेश द्वार का भी उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही, चार लेन वाले वाहनों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए पुल सहित पहुंच संबंधी अवसंरचना का उद्घाटन किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग मार्ग भी शामिल हैं।

ये अवसंरचनात्मक विकास प्रोजेक्ट सीबर्ड के जारी चरण आईआईए का हिस्सा हैं। इस परियोजना के दायरे में दोहरे उपयोग वाले नौसैनिक वायु स्टेशन, पूर्ण विकसित नौसैनिक डॉकयार्ड तथा जहाजों और विमानों के लिए लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का निर्माण शामिल है। लगभग 10,000 वर्दीधारी एवं असैनिक कर्मियों और उनके परिवारों को आवास उपलब्ध कराने वाला यह नौसेना बेस उत्तर कन्नड़ क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था, उद्योग और पर्यटन को उल्लेखनीय प्रोत्साहन देगा तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अनेक अवसर सृजित करेगा।

यह परियोजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) तथा भारतीय हरित भवन परिषद के लागू मानकों के अनुरूप है। परियोजना के पूर्ण होने पर इसे आईजीबीसी गोल्ड रेटिंग प्राप्त होने की अपेक्षा है। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री और उपकरणों की आपूर्ति घरेलू स्रोतों से की जा रही है।

 

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Author: sajagkutch

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