डीएआरई/आईसीएआर ने स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के अंतर्गत लगभग 4,000 स्वच्छता अभियान चलाए

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) अपने 114 संस्थानों, क्षेत्रीय केंद्रों, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (एटीएआरआई) और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के साथ, 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले एक महीने के स्वच्छता विशेष अभियान 6 में भाग ले रहा है ।

 

डीएआरई / आईसीएआर ने इससे पहले, 2 अक्टूबर 2026 को , देशभर में अपने प्रतिष्ठानों में स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 की शुरुआत की। आईसीएआर मुख्यालय के अधिकारियों ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी), पूसा, नई दिल्ली में आयोजित इस अभियान में भाग लिया। यह पहल स्वच्छ कार्यस्थलों, अधिक जनभागीदारी और सतत स्वच्छता की संस्कृति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो स्वच्छता की भावना को सुदृढ़ करती है। महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि भी अर्पित की गई।

 

स्वच्छता विशेष अभियान 6 की मुख्य विशेषताएं

 

विभिन्न संस्थानों में स्वच्छता विशेष अभियान 6 की प्रमुख उपलब्धियों में लगभग 4,000 स्वच्छता अभियान आयोजित करना, लगभग 1.3 लाख वर्ग फुट क्षेत्र की सफाई करना और इलेक्ट्रॉनिक एवं गैर-इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ के निपटान से लगभग 10 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त करना शामिल है। लंबित मामलों को निपटाने के प्रयास भी जारी हैं। गतिविधियों में संस्थागत परिसरों, गांवों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान और श्रमदान; विशेष ग्राम सभाएं, स्वच्छता सभाएं और स्वच्छता, साफ-सफाई, अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक उत्तरदायित्व पर जागरूकता कार्यक्रम; कूड़ा-करकट हटाना; स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (सीटीयू) में वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाना, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” के तहत पहल भी शामिल है; कूड़ेदानों का वितरण और स्थापना; सफाई मित्रों, स्वच्छता कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को सम्मानित करना और सफाई के बाद के दस्तावेज़ीकरण के साथ साफ किए गए स्थानों का सौंदर्यीकरण करना शामिल है। अन्य पहलों में जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग जैसी टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियां और उचित निपटान एवं अभिलेख प्रबंधन के लिए पुरानी फाइलों की समीक्षा और छंटाई शामिल हैं।

 

स्वच्छता विशेष अभियान 6 के प्रमुख परिणाम

 

इस अभियान के प्रमुख परिणामों में स्वच्छता और सफाई के लिए सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करना; चयनित संस्थागत और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता में सुधार करना, जिसे पहले और बाद की तस्वीरों के माध्यम से दस्तावेज़ीकृत किया गया और कूड़ेदान वितरण, कचरा संग्रहण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जिम्मेदार अपशिष्ट निपटान के प्रति जागरूकता बढ़ाना शामिल है। इस अभियान ने साफ किए गए क्षेत्रों में वृक्षारोपण और हरियाली के माध्यम से स्वच्छता को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ एकीकृत किया, सफाई मित्रों, स्वच्छता कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के योगदान को मान्यता दी, और जलकुंभी की वर्मीकम्पोस्टिंग और पुरानी फाइलों की उचित समीक्षा और छंटाई जैसी टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा दिया।

डीएआरई/आईसीएआर संस्थानों द्वारा चलाए गए अभियान की कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान: आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-सीसीएआरआई) में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्रमिक सम्मान था। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर-सीसीएआरआई के सफाई मित्रों को शॉल, फूलों के गुलदस्ते और उपहार भेंट कर उन्‍हें सम्‍मानित किया। ये सभी सफाई मित्र वर्ष भर परिसर को स्वच्छ और स्वास्थ्यकर बनाए रखने के लिए समर्पित सेवाएं प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में स्वच्छता, सेवा और श्रमिक सम्मान की भावना को उजागर किया गया और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के प्रति सफाई मित्रों के अमूल्य योगदान को मान्यता दी गई।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई), नई दिल्ली : आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई), नई दिल्ली ने 2 अक्टूबर 2026 को “स्वच्छता में सहभाग – स्वच्छ भारत, विकसित भारत” विषय के अंतर्गत स्वच्छ भारत दिवस मनाया। इस अवसर पर संस्थान भर में स्वच्छता गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की गई और स्वच्छ एवं स्वस्थ संस्थागत वातावरण बनाए रखने के लिए निरंतर भागीदारी का आह्वान किया गया। सचिव (डीएआरई) और महानिदेशक (आईसीएआर), डॉ. मांगी लाल जाट ने अपने संबोधन में आईसीएआर-आईएआरआई द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की सराहना की और स्वच्छता को साल भर चलने वाली गतिविधि बनाने का आह्वान किया, जिसमें स्वच्छता कार्यक्रम टीम-आधारित तरीके से चलाए जाएं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छता और बेहतर कार्यस्थल वातावरण कर्मचारियों के समग्र कल्याण में योगदान करते हैं और विज्ञान की प्रगति तथा लोगों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं। टीम निर्माण और सकारात्मक कार्यस्थल वातावरण बनाने के महत्व पर प्रकाश डाला गया और संस्थागत कामकाज तथा मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के महत्व पर बल दिया गया, जिससे वे जिम्मेदार पेशेवर और विज्ञान एवं समाज में भावी योगदानकर्ता बन सकें। कार्यक्रम के अंतर्गत, स्वच्छता अभियान के दौरान आईसीएआर-आईएआरआई के स्नातकोत्तर छात्र संघ द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को कला के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारी पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।

आईसीएआर के संस्थानों ने ‘अपशिष्ट से कला’, प्लास्टिक-मुक्त पहल और अपशिष्ट पदार्थों के रचनात्मक उपयोग जैसी गतिविधियों के माध्यम से ‘कम करें, पुनः उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें’ के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया है। अपशिष्ट को उपयोगी और सौंदर्यपूर्ण उत्पादों में परिवर्तित करने, जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपशिष्ट को संसाधन में बदलने के संदेश पर जोर दिया गया। स्वच्छता अभियान के तहत, परिसर से अविघटनीय प्लास्टिक अपशिष्ट, कूड़ा और अवांछित खरपतवारों को एकत्र कर हटाया गया। इस गतिविधि से परिसर की स्वच्छता और समग्र रूप में सुधार हुआ। प्रतिभागियों को स्वच्छ और प्लास्टिक-मुक्त परिसर बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया और उन्हें सतत स्वच्छता प्रथाओं में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

 

स्वच्छता विशेष अभियान 6 के अंतर्गत , डीएआरई / आईसीएआर छात्रों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। हमारा वर्तमान उद्देश्य नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ समाज के लिए उपयुक्त आदतों को विकसित करना है। जन जागरूकता बढ़ाना और अभियान को व्यापक स्तर पर प्रचारित करना हमारा लक्ष्य है। बिहार के पटना स्थित पूर्वी क्षेत्र के लिए आईसीएआर अनुसंधान परिसर की कुछ झलकियाँ नीचे दी गई हैं।

आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, तेलंगाना: आईसीएआर-सीआरआईडीए में परिसर की साफ-सफाई में सुधार के साथ-साथ खेतों में आने-जाने वाले या काम करने वाले लोगों को हानिकारक कीटों से बचाने के उपाय किए जा रहे हैं। स्वच्छता अभियान का उद्देश्य परिसर के भीतर स्वच्छ, स्वास्थ्यकर और पर्यावरण के अनुकूल वातावरण बनाए रखना और कृषि अनुसंधान संस्थानों में स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना है। फार्म के आसपास की सफाई, अवांछित वनस्पति को हटाने, कूड़ा-कचरा और अपशिष्ट पदार्थों को इकट्ठा करने और आंतरिक रास्तों, खुले स्थानों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डीएआरई/आईसीएआर कार्यस्थल की कार्यकुशलता में सुधार, फार्म कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर की समग्र साफ-सफाई बनाए रखने में स्वच्छता की भूमिका पर प्रकाश डालता है।

स्वच्छता से पहले स्वच्छता के बाद

 

आईसीएआर-सीसीएआरआई, गोवा में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और अनुपयोगी व अप्रचलित वस्तुओं की पहचान करके उनके उचित निपटान के लिए लंबित निपटान को कम करने हेतु क्षेत्रीय इकाइयों से स्क्रैप की पहचान हेतु विशेष अभियान चलाया गया। चल रहे अभियान के अंतर्गत, गेस्ट हाउसों से स्क्रैप सामग्री की पहचान के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया। धातु की वस्तुएं (70 किलोग्राम), एमसीबी पैनल (200 किलोग्राम), बाड़ लगाने का तार (100 किलोग्राम) और प्लास्टिक की वस्तुएं (20 किलोग्राम) जैसे स्क्रैप की पहचान निपटान हेतु की गई। इन वस्तुओं को अनुमोदित निपटान तंत्र के अंतर्गत आगे की प्रक्रिया के लिए सूचीबद्ध किया गया।

विशेष अभियान 6.0 के तहत, बिहार के मोतिहारी स्थित आईसीएआर-महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान के बागान क्षेत्र की स्वच्छता और रखरखाव का कार्य किया गया। इस गतिविधि में केले के बागान की पंक्तियों और आसपास के हरित क्षेत्रों को शामिल किया गया, जिसमें उगी हुई खरपतवारों, अवांछित वनस्पतियों और बिखरे हुए कचरे पर विशेष ध्यान दिया गया। बागान क्षेत्रों को स्वच्छ, सुलभ और सुव्यवस्थित रखने के लिए ऐसी वनस्पतियों को नियमित रूप से हटाना और कचरे का उचित निपटान करना आवश्यक है। मुख्य ध्यान बागान की पंक्तियों के रखरखाव; खरपतवार और वनस्पति प्रबंधन; कचरा हटाने और संस्थान के हरित क्षेत्रों की नियमित स्वच्छता पर केंद्रित था।

आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो, नागपुर

आईसीएआर-एनईएच क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियाम, मेघालय

इस वर्ष के अभियान का विषय इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटान था, इसलिए अधिकतम राजस्व अर्जित करने के लिए इन वस्तुओं को एकत्र करने, अलग करने और अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं, नवीनीकरणकर्ताओं और डेवलपर्स को सौंपने के प्रयास किए गए।

आईसीएआर-राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद

व्यापक प्रसार और पहुंच के लिए, आईसीएआर मुख्यालय ने अभियान के अंतर्गत की गई गतिविधियों पर प्रेस विज्ञप्तियां जारी की हैं, जबकि आईसीएआर संस्थानों और प्रतिष्ठानों ने स्थानीय प्रिंट मीडिया, बैनर और अन्य संचार माध्यमों के माध्यम से अपनी गतिविधियों का प्रचार किया है। मुख्यालय और संस्थागत स्तर पर, अभियान और इसकी गतिविधियों का प्रसार फेसबुक, X और इंस्टाग्राम सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी किया जा रहा है, जिससे स्वच्छता का संदेश आईसीएआर नेटवर्क से परे व्यापक और विविध दर्शकों, विशेष रूप से डिजिटल रूप से सक्रिय दर्शकों और युवा पीढ़ी तक पहुंच रहा है।

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Author: sajagkutch

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