उत्तरायण 2026 से पहले गुजरात हाईकोर्ट ने नायलॉन और चाइनीज़ मांझा से बने प्रतिबंधित पतंग के धागों और चाइनीज़ स्काई लैंप (तुक्कल) को लेकर राज्य सरकार की कार्रवाई की समीक्षा की। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि इन जानलेवा वस्तुओं का निर्माण, बिक्री, भंडारण या उपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं।
राज्य सरकार की ओर से गृह विभाग के मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर बताया कि चाइनीज़ मांझा, कांच-कोटेड नायलॉन डोर, कृत्रिम प्लास्टिक डोर और प्रतिबंधित तुक्कल के खिलाफ विशेष प्रवर्तन अभियान और जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कोर्ट ने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश दिया है कि प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री और जब्ती को लेकर रोज़ाना (डे-टू-डे) रिपोर्ट पेश की जाए।
शपथपत्र के अनुसार, 21 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच राज्यभर में 59 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 12,066 से अधिक प्रतिबंधित डोर और संबंधित सामग्री जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 36.80 लाख रुपये है। इस दौरान 73 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
जनजागरूकता के तहत स्कूलों, कॉलेजों और बाजारों में 116 बैठकें आयोजित की गईं। साथ ही अखबारों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक अनाउंसमेंट के जरिए लोगों को प्रतिबंधित डोर के खतरों से अवगत कराया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तरायण के दौरान प्रतिबंधित वस्तुओं के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को होगी।
