‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में खिसकली जैसी भूमिका निभाएं: गांधीनगर कलेक्टर मेहुल के. दवे का संदेश, कलोल तालुका के पियज गांव का औचक निरीक्षण

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‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए मजबूत नेतृत्व और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन अत्यंत आवश्यक है। सरकार की योजनाओं और विकास का लाभ अंतिम छोर तक बसे नागरिकों और जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से गांधीनगर जिला कलेक्टर श्री मेहुल के. दवे नियमित रूप से गांवों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं।

इसी क्रम में 30 दिसंबर को कलेक्टर श्री मेहुल के. दवे ने गांधीनगर जिले के कलोल तालुका अंतर्गत पियज गांव का आकस्मिक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली की जांच की तथा ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने।

कलेक्टर श्री दवे हर सप्ताह अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर कम से कम दो से चार गांवों का दौरा कर रहे हैं। इन निरीक्षणों के दौरान वे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं, पंचायतों के माध्यम से दी जा रही जनसेवाओं, आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की स्थिति की समीक्षा करते हैं। साथ ही वे ग्रामीणों को सरकार की प्रमुख योजनाओं और अभियानों—जैसे प्राकृतिक कृषि अभियान, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘स्वच्छ भारत अभियान’—के महत्व और लाभों की जानकारी देकर अधिक से अधिक लोगों को इनसे जोड़ने का प्रयास करते हैं।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत से होने वाले दुष्परिणामों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल से दूर रखने, उन्हें लोरियां, देशभक्ति गीत और प्रेरणादायक कहानियां सुनाने तथा पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया। इसके साथ ही सह-भोजन, माता-पिता पूजन जैसी परंपराओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सामाजिक संदेश भी दिया।

पियज गांव में आयोजित संवाद के दौरान कलेक्टर श्री दवे ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमें रामसेतु निर्माण में सहायक खिसकली की तरह अपनी-अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कार्य भी यदि पूरी निष्ठा से किए जाएं, तो वे राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

उन्होंने सभी कर्मचारियों से अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करने का आग्रह किया, ताकि जब ‘विकसित भारत’ की उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाए, तब हम और हमारे परिवार गर्व और आत्मसंतोष के साथ उसमें सहभागी होने का गौरव महसूस कर सकें।

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Author: sajagkutch

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