छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद शर्मनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां ड्यूटी पर तैनात एक महिला कांस्टेबल के साथ भीड़ द्वारा अमानवीय व्यवहार किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की पहचान की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा
यह घटना 27 दिसंबर 2025 को रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में उस समय हुई, जब कोयला खनन परियोजना के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के हिंसक हो जाने के बाद हालात बेकाबू हो गए। इसी दौरान एक महिला कांस्टेबल भीड़ से बिछड़कर एक खेत में अकेली रह गई।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दो युवक महिला कांस्टेबल के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। महिला कांस्टेबल हाथ जोड़कर रोते हुए उनसे छोड़ देने की गुहार लगाती नजर आ रही है और बार-बार कहती है कि उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। बावजूद इसके, आरोपियों ने उसके साथ अभद्रता की और एक आरोपी पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाता रहा।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला ने जानकारी दी कि इस मामले में अब तक दो स्थानीय युवकों को गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास, लूट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस बाकी आरोपियों की पहचान कर रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सुरक्षा पर सवाल
इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने वीडियो साझा करते हुए राज्य की भाजपा सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। महिला कांग्रेस का कहना है कि जब महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल उठते हैं। प्रदेश कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने इस घटना को “अत्यंत भयावह और शर्मनाक” बताया है।
खनन परियोजना बना टकराव की वजह
स्थानीय ग्रामीण जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस परियोजना से उनकी आजीविका प्रभावित होगी और उन्हें विस्थापन का सामना करना पड़ेगा। पिछले सप्ताह जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, तब हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान भीड़ ने पुलिस बस, एंबुलेंस समेत कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था।
इस हिंसा में तमनार थाने की एसएचओ कमला पुसाम भी घायल हुई थीं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल इस कोयला परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई प्रक्रिया को रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
