गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी तालुका स्थित बिदड़ा गांव में आठ महीने पहले सामने आए बुजुर्ग की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी महिला की नियमित जमानत याचिका को सेशंस कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
प्रेम विवाह से उपजा था खौफनाक विवाद
यह मामला उस समय उजागर हुआ था जब एक युवक द्वारा युवती को भगाकर प्रेम विवाह किए जाने से नाराज़ होकर तीन महिलाओं ने युवक के वृद्ध पिता की सरेआम डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। यह घटना पूरे इलाके में दहशत का कारण बनी थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीनों आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।
आरोपी महिला ने बेटे की बीमारी का दिया हवाला
इस हत्या मामले में आरोपी महिला राजबाई विरम साकरिया ने सेशंस कोर्ट में नियमित जमानत के लिए आवेदन दाखिल किया था। जमानत याचिका में यह दलील दी गई कि आरोपी का पुत्र जन्म से दिव्यांग है और मानसिक बीमारी से पीड़ित है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी न्यायिक हिरासत में होने के कारण वह अपने बेटे की देखभाल नहीं कर पा रही है और उसका इलाज प्रभावित हो रहा है।
अभियोजन पक्ष का कड़ा विरोध
वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी के परिवार में अन्य सदस्य मौजूद हैं, जो दिव्यांग पुत्र की उचित देखभाल कर रहे हैं। इसके साथ ही आशंका जताई गई कि यदि आरोपी महिला को जमानत पर रिहा किया गया, तो वह गवाहों को डराने-धमकाने के साथ-साथ शिकायतकर्ता पक्ष के केस को नुकसान पहुंचा सकती है।
अदालत का सख्त रुख
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सेशंस कोर्ट ने आरोपी महिला की जमानत याचिका नामंजूर कर दी।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, वहीं मामले को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
