भाषिनी राजयम कार्यशाला – मणिपुर चैप्टर ने भाषा प्रौद्योगिकी, स्थानीय भाषा डेटा और नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं पर चर्चा की
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग ने मणिपुर सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से 14 अक्टूबर, 2026 को इम्फाल में भाषिनी राजयम कार्यशाला, मणिपुर अध्याय का आयोजन किया। कार्यशाला में बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने, भाषा प्रौद्योगिकी को मजबूत करने और सरकारी एवं नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं में भारतीय भाषा समाधानों को एकीकृत करने के अवसरों को खोजा जाएगा।
इस कार्यक्रम में मणिपुर के मुख्यमंत्री श्री युमनाम खेमचंद सिंह उपस्थित हुए। कार्यक्रम के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाकर डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने में भाषा प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यशाला को दौरान डीआईबीडी और मणिपुर सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। डीआईबीडी की ओर से मणिपुर सरकार का प्रतिनिधित्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ नाग और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री सोमरजीत सलाम, आईएएस ने किया। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य भाषा प्रौद्योगिकी में सहयोग को मजबूत करना, भाषा संसाधनों में सुधार करना और राज्य भर में बहुभाषी डिजिटल सेवाओं के लिए समाधान तलाशना है।

सभा को संबोधित करते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री श्री युमनाम खेमचंद सिंह ने भारत की भाषाई विविधता को बढ़ावा देने और राज्य के समुदायों के लिए अवसरों का विस्तार करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषा प्रौद्योगिकी की क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषा प्रौद्योगिकी के माध्यम से हम भारत की विविध भाषाओं को बढ़ावा दे रहे हैं और मणिपुर की अधिक भाषाओं को डिजिटल क्षेत्र में लाने के अवसरों की खोज कर रहे हैं। हमारी भाषाई विविधता आगे बढ़ने में एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
मणिपुर सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी सचिव, आईएएस श्री सोमरजीत सलाम ने कहा कि डिजिटल सेवाएं उन लोगों के लिए सुलभ और सार्थक होनी चाहिए जिनके लिए वे बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाएं तभी प्रभावी होती हैं जब लोग उन्हें समझ सकें और आत्मविश्वास से उनका उपयोग कर सकें। भाषिनी के माध्यम से, हम सावधानीपूर्वक परखे गए समाधानों के साथ भाषा संबंधी बाधाओं को दूर कर सकते हैं जो मणिपुर की जरूरतों को पूरा करते हैं और स्थायी जनहित प्रदान करते हैं।
इस कार्यशाला में भाषिनी के भाषा-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) और इसके बहुभाषी एआई इकोसिस्टम का अवलोकन प्रस्तुत किया गया, जिसमें विभिन्न भाषाओं में डिजिटल सेवाएं प्रदान करने में भाषा डेटासेट, एआई मॉडल, एपीआई और अनुप्रयोगों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। चर्चाओं में यह पता लगाया गया कि अधिक सुलभ सेवा वितरण को बढ़ावा देने के लिए इन क्षमताओं को सरकारी प्लेटफार्मों और नागरिकों के लिए उपलब्ध अनुप्रयोगों में कैसे एकीकृत किया जा सकता है।
अंग्रेजी से मणिपुरी में वास्तविक समय में अनुवाद का एक लाइव प्रदर्शन भाषा प्रौद्योगिकी की क्षमता को दर्शाता है, जिससे संचार की कमियों को दूर किया जा सकता है। सत्र में डिजिटल भाषा संसाधनों के निर्माण और भाषा विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों से प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रासंगिक डेटा का उपयोग करके भाषा मॉडलों को मान्य करने के महत्व पर भी चर्चा की गई, ताकि वास्तविक दुनिया में उनकी उपयोगिता में सुधार किया जा सके।
भारत की विविधता को प्रतिबिंबित करने वाली भाषा प्रौद्योगिकियों के विकास की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डीआईबीडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ नाग ने कहा कि एआई को भारत की सभी भाषाई विविधता को समझना चाहिए। मणिपुर के साथ हमारी साझेदारी के माध्यम से, हमारा लक्ष्य भाषा प्रौद्योगिकियों को मजबूत करना, व्यावहारिक अनुप्रयोगों का विस्तार करना और यह सुनिश्चित करना है कि भाषा डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने या अवसरों का लाभ उठाने में बाधा न बने।
इस कार्यशाला में मणिपुर की भाषाई विविधता पर प्रकाश डाला गया, जिसमें मणिपुरी, तंगखुल, थाडौ, पैते, हमार, लियांगमाई और राज्य भर में बोली जाने वाली अन्य भाषाएं शामिल हैं। राज्य का भाषाई ज्ञान, स्थानीय विशेषज्ञता और सामुदायिक भागीदारी क्षेत्रीय आवश्यकताओं और संचार प्रथाओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने वाली भाषा प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान दे सकती है।
सत्रों में शासन और नागरिक सेवाओं में बहुभाषी एआई के अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कानूनी सेवाएं और शिकायत निवारण शामिल हैं। डेवलपर्स, छात्रों और नवप्रवर्तकों के लिए एक परस्पर संवादात्मक प्लेटफॉर्म, भाषिनी शिल्पी ने भाषा एआई के साथ सीखने, प्रयोग करने, समस्याओं को हल करने और निर्माण करने का अवसर प्रदान किया। एक पारंपरिक प्रौद्योगिकी सत्र से आगे बढ़कर, इसने प्रतिभागियों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का पता लगाने, विचारों का आदान-प्रदान करने और भाषिनी की भाषा प्रौद्योगिकियों, सेवाओं और एपीआई के साथ विकास, विस्तार और नवाचार की संभावनाओं को खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। परस्पर संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने संभावित अनुप्रयोगों पर चर्चा के साथ-साथ कार्यान्वयन पर स्पष्टता से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की। भाषिनी मित्र पहल को राज्य संस्थानों और भाषा समुदायों के लिए भाषा डेटा का योगदान करने और बहुभाषी एआई संसाधनों को मजबूत करने के एक माध्यम के रूप में भी उजागर किया गया।

अगले चरण के रूप में, डीआईबीडी और मणिपुर सरकार प्राथमिकता वाले उपयोग मामलों की पहचान करेंगे, भाषा-डेटा आवश्यकताओं का आकलन करेंगे और प्रासंगिक सरकारी प्लेटफार्मों में भाषिनी की भाषा प्रौद्योगिकियों के एकीकरण की संभावनाओं का पता लगाएंगे। यह सहयोग भाषा संसाधनों को मजबूत करने और भाषा विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर ऐसे समाधान विकसित करने और मान्य करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा जो राज्य की भाषाई विविधता और सार्वजनिक सेवा आवश्यकताओं को दर्शाते हों।
भाषिनी राज्यम पहल का उद्देश्य भाषिनी और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को मजबूत करना है, जिससे भाषा प्रौद्योगिकी क्षमताओं को व्यावहारिक समाधानों में बदलने में सहायता मिल सके जो डिजिटल सेवाओं तक पहुंच में सुधार करते हैं और भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक भागीदारी को सक्षम बनाते हैं।
डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग (डीआईबीडी) के बारे में
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन का डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग भारत की भाषा-प्रधान डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को बढ़ावा दे रहा है ताकि डिजिटल सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच सुनिश्चित हो सके। भाषिनी भाषा डेटासेट, एआई मॉडल, एपीआई और अनुप्रयोगों को एक साथ लाकर सरकारी विभागों, डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को बहुभाषी एआई समाधान विकसित करने में सहायता प्रदान करता है। यह 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को संचालित करता है, 9 अरब से अधिक एआई अनुमानों को सक्षम कर चुका है और प्रतिदिन 24 मिलियन से अधिक एआई अनुमानों को संसाधित करता है। भाषिनी पाठ के लिए 36 भारतीय भाषाओं, आवाज के लिए 23 भारतीय भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है, जिससे भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में भाषा प्रौद्योगिकी को अपनाने में तेजी आ रही है।

