गुजरात हाईकोर्ट ने सुरत के एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पिता को अपनी नाबालिग बेटी पर दुष्कर्म और हत्या के आरोप से बरी कर दिया। मामले की निचली अदालत ने उसे मृत्युदंड सुनाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने जांच में पाई गई गंभीर प्रक्रियागत खामियों और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के आधार पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल शक के आधार पर कोई व्यक्ति मृत्युदंड का पात्र नहीं ठहर सकता। यह फैसला फॉरेंसिक प्रक्रियाओं में सतर्कता और सटीकता की आवश्यकता पर एक चेतावनी है।

