छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने नए साल की शुरुआत बड़े और निर्णायक अभियान के साथ की है। वर्ष 2026 के पहले ही सप्ताह में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा जिलों में हुए अलग-अलग अभियानों में कुल 14 नक्सली मारे गए हैं।
सुकमा में सबसे बड़ा एनकाउंटर
मारे गए नक्सलियों में से 12 नक्सली सुकमा जिले में ढेर किए गए, जिनमें 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं। वहीं, बीजापुर जिले के जंगलों से 2 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं।
यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर राज्य पुलिस बल और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) द्वारा संयुक्त रूप से अंजाम दी गई।
2025 में 285 नक्सली ढेर, 2026 की डेडलाइन नजदीक
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में कुल 285 नक्सली मारे गए थे। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है।
जैसे-जैसे यह समयसीमा नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियानों की रफ्तार और तेज कर दी है।
नक्सलियों में डर, बड़े नेता ने किया आत्मसमर्पण
लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सलियों में भय का माहौल है, जिसके चलते अब वे सरेंडर करने लगे हैं।
हाल ही में मारे गए शीर्ष नक्सली नेता माड़वी हिड़मा के करीबी सहयोगी बर्सा देवा ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
एक करोड़ का इनामी बर्सा देवा 19 साथियों संग मुख्यधारा में लौटा
तेलंगाना में सक्रिय बर्सा देवा पर पुलिस और प्रशासन ने एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित कर रखा था।
बर्सा देवा ने अकेले नहीं, बल्कि अपने 19 साथियों के साथ हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई।
सरेंडर के दौरान सुरक्षाबलों ने 48 एलएमजी (लाइट मशीन गन) और लगभग 20 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
बटालियन नंबर-1 का प्रमुख रह चुका है बर्सा देवा
बर्सा देवा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुर्वती गांव का निवासी है और नक्सल संगठन में उसे बटालियन नंबर-1 का प्रमुख भी बनाया गया था। सुरक्षाबलों का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
