महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानों की गर्मी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा है कि अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP का शरद पवार की अगुवाई वाली NCP (शरदचंद्र पवार गुट) में विलय हो जाना चाहिए।
‘एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं, तो अलग रास्ते क्यों?’ – संजय राउत
संजय राउत ने कहा कि जब पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों NCP गुट एक साथ आ सकते हैं, तो फिर अलग-अलग राजनीतिक राह अपनाने का कोई तर्क नहीं बचता।
उनका कहना है कि यह गठबंधन भविष्य के बड़े राजनीतिक संकेत देता है।
महायुति सरकार पर उठाए सवाल
राउत ने सवाल किया कि यदि अजित पवार खुद भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, तो वे फिर भी भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में क्यों बने हुए हैं?
उन्होंने कहा,
“जब आरोप इतने गंभीर हैं, तो एक ही सरकार में रहना जनता को भ्रमित करने जैसा है। यह विश्वास के खिलाफ है।”
राउत के मुताबिक, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अजित पवार की राजनीतिक दिशा बदल रही है, और उन्हें भाजपा का साथ छोड़कर शरद पवार के पास लौटना चाहिए।
पुणे–पिंपरी चुनाव में गठबंधन को बताया बड़ा संकेत
संजय राउत ने जोर देकर कहा कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में NCP और NCP (शरदचंद्र पवार) के बीच तालमेल यह दर्शाता है कि दोनों गुट साथ आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब रास्ता साफ दिख रहा है, तो स्थायी समाधान की ओर कदम क्यों न बढ़ाया जाए।
अजित पवार के भ्रष्टाचार आरोपों पर भी सवाल
हाल ही में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम में भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए थे।
उन्होंने दावा किया था कि पिछले 9 वर्षों में नगर निगम को कर्ज में डुबो दिया गया।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने सवाल उठाया कि जब इतने वर्षों तक भाजपा इस नगर निगम को चला रही थी, तब उसकी स्थिति क्यों नहीं सुधरी?
भाजपा का पलटवार, बयानबाज़ी तेज
अजित पवार के आरोपों के बाद भाजपा ने भी तीखा जवाब दिया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा,
“अगर हम बोलने लगे, तो अजित दादा मुश्किल में पड़ जाएंगे। उन्हें पहले अपने कर्मों को देखना चाहिए।”
नगर निगम चुनावों में टिकट वितरण पर भी विवाद
नगर निगम चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने पर भी विवाद हुआ।
इस पर अजित पवार ने सफाई देते हुए कहा कि,
“जब तक कोई दोषी साबित नहीं होता, तब तक उसे अपराधी नहीं कहा जा सकता।”
उन्होंने सिंचाई घोटाले से जुड़े आरोपों का भी जिक्र करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की।
