तिरुमाला घी विवाद: आंध्रप्रदेश मंत्री का दावा— 2019 में YSRCP सरकार ने टेंडर की शर्तें बदली थीं

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आंध्रप्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने तिरुमाला मंदिर में घी आपूर्ति से जुड़े विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 2019 में सत्ता में आने के बाद YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने आपूर्ति टेंडर की शर्तों में बदलाव किया, जिससे घी के निविदा प्रक्रिया में अनियमितताएँ हुईं और विवाद का रास्ता खुला।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले निर्धारित नियमों के तहत घी की आपूर्ति से जुड़ी प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष थी, लेकिन 2019 में जब YSRCP की सरकार बनी, तब टेंडर शर्तों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। इन बदलावों के कारण कुछ फर्मों को लाभ पहुंचने की संभावना बनी, जिससे बाद में घी की आपूर्ति और सरकारी देयकों को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

उन्होंने कहा कि इस बदलती प्रक्रिया के चलते घी आपूर्ति से जुड़ी चीजों का कीमत निर्धारण, गुणवत्ता मानक और बोलीदाता चयन जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रभावित हुए, जिससे मंदिर प्रशासन और आपूर्तिकर्ताओं के बीच मुद्दे बढ़े। इस विवाद को सार्वजनिक होने के बाद राजनीति भी गर्माई और विपक्षी दलों ने इसे सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया।

आंध्रप्रदेश मंत्री ने यह भी जोर देकर कहा कि यदि टेंडर शर्तें पूर्व की तरह पारदर्शी होतीं, तो आज यह मुद्दा विवाद का रूप नहीं लेता। उन्होंने भविष्य में ऐसी प्रक्रियाओं में ज्यादा स्पष्टता और कड़े मानकों को लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि धार्मिक संस्थानों से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता न हो।

इस पूरे विवाद ने तिरुमाला जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल से जुड़े आर्थिक और प्रशासनिक पक्षों पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जहां आपूर्ति शर्तों, गुणवत्ता मानकों और निविदा प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक चर्चा सामने आई है। मामला अब राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है, और इससे जुड़े पक्ष आगे भी अपनी अपनी दलीलें मजबूती से रख रहे हैं।

 

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Author: Sajag Kutch

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