दिल्ली की बात: सरकार ने 34 किताबों को दी मंजूरी, लेकिन पूर्व सेना जनरल नरवणे की किताब पर तलवार क्यों लटकी?

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नई दिल्ली से आने वाली खबर के मुताबिक केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सेना अधिकारियों और अन्य लेखकों द्वारा लिखी कई किताबों को प्रकाशित होने की मंजूरी दी है, लेकिन भूतपूर्व भारतीय सैन्य जनरल एम.एम. नरवणे की आत्मकथा-संबंधित पुस्तक को अब तक अनुमति नहीं दी गई है। इस संदर्भ में संसद में भी चर्चा हुई थी जब कुछ अंश का उल्लेख राहुल गांधी ने लोकसभा में किया, जिसके बाद विवाद और अधिक बढ़ गया।
विशेषज्ञों और राजनीतिज्ञों के बीच यह बहस चल रही है कि सरकारी प्रकाशन मंजूरी की प्रक्रिया में क्या मानदंड लागू हैं और नरवणे की पुस्तक को अन्य किताबों से अलग क्यों माना जा रहा है। इससे लेखकों की अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता तथा नैतिकता और सुरक्षा के बीच संतुलन पर सवाल उठे हैं, जो दिल्ली के राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

Sajag Kutch
Author: Sajag Kutch

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