गुजरात के नर्मदा जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर भारी संकट उजागर हुआ है, जहाँ 145 प्राथमिक और मध्य-स्तर के स्कूलों में केवल एक-एक ही शिक्षक कार्यरत है। ऐसे हालात में यह मुश्किल है कि एक ही शिक्षक सभी कक्षाओं और बच्चों को पर्याप्त शिक्षा दे सके।
शिक्षण मंत्री ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि नर्मदा और पड़ोसी दाहोद जिलों में शिक्षक-शक्ति में भारी कमी आई है। अकेले नर्मदा में 549 शिक्षकों की कमी है, जबकि दाहोद में यह संख्या 1284 है। इससे यह सवाल उठता है कि बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा कैसे मिल पा रही है।
विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल की इमारतें और आधारभूत संरचना भी अपर्याप्त बताई गई हैं। कई स्थानों पर बच्चे बाहर, पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि शिक्षक अक्सर बैठकें या अन्य प्रशासनिक कामों में व्यस्त रहते हैं।
स्थानीय विधायक ने आरोप लगाया है कि इन पिछड़े इलाकों में पर्याप्त स्कूल भवन और शिक्षक नियुक्ति नहीं होने से शिक्षा का स्तर गिर रहा है, जबकि हर साल शिक्षा के लिए बड़ी रकम बजट में आवंटित की जाती है।
