देश की राजधानी दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। “दिल्ली नी बात” कॉलम में सामने आया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते मध्य-पूर्व (Middle East) तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों पर दिखाई देने लगा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने भारत की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे GDP ग्रोथ पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार से सवाल पूछ रहा है कि वैश्विक संकट के बीच भारत अपनी अर्थव्यवस्था को कैसे सुरक्षित रखेगा। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध का असर अब भारत के रियल एस्टेट और अन्य सेक्टरों तक पहुंचने लगा है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ रही है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो सत्ताधारी दल के भीतर भी रणनीतिक बैठकों का दौर जारी है, ताकि आने वाले समय में आर्थिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति बनाई जा सके।
