युद्ध की आग में पर्यावरण भूला: ताकत की होड़ में दुनिया ने ‘धरती बचाओ’ के वादे भुलाए

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दुनिया भर में चल रहे युद्धों और संघर्षों के बीच एक बड़ा और गंभीर मुद्दा लगभग नजरअंदाज हो गया है—पर्यावरण संरक्षण। “न्यूज़ फोकस” रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जिन देशों और समाजों ने कभी पर्यावरण बचाने की बड़ी-बड़ी बातें की थीं, वही आज युद्ध की विनाशकारी गतिविधियों के सामने चुप दिखाई दे रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन उत्सर्जन और जैव विविधता जैसे मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा होती थी। बड़े-बड़े सम्मेलनों में पृथ्वी को बचाने के संकल्प लिए जाते थे, लेकिन अब युद्ध की स्थिति में ये सभी मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं।

विशेष रूप से अमेरिका और ईरान जैसे देशों के बीच बढ़ते तनाव और अन्य वैश्विक संघर्षों के कारण बड़े पैमाने पर बमबारी, मिसाइल हमले और औद्योगिक ढांचे की तबाही हो रही है। इससे न केवल मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि हवा, पानी और जमीन भी प्रदूषित हो रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक तरफ लोग दिवाली जैसे त्योहारों पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण की आलोचना करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ युद्ध में होने वाले विस्फोटों और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर कोई ध्यान नहीं देता।

आज स्थिति यह है कि दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में किसी न किसी रूप में संघर्ष या युद्ध जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे लंबे संघर्षों में ऊर्जा संयंत्रों, तेल भंडारों और रासायनिक उद्योगों पर हमलों से जहरीले तत्व वातावरण में फैल रहे हैं, लेकिन इस पर वैश्विक स्तर पर गंभीर चर्चा नहीं हो रही।

Sajag Kutch
Author: Sajag Kutch

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