49 साल पुराने हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तीन आरोपियों को किया बरी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

न्यायपालिका की लंबी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाले एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वर्ष 1977 के हत्या मामले में तीन जीवित आरोपियों को करीब 49 साल बाद बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में पूरी तरह विफल रहा और निचली अदालतों ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया।

यह मामला 28 जून 1977 को हुई एक हत्या से जुड़ा था, जिसमें छह लोगों पर घातक हथियारों से हमला कर हत्या करने का आरोप लगाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। हालांकि, लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान दो आरोपियों का निधन हो गया, जबकि शेष तीन ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बेगुनाही की अपील जारी रखी।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही में गंभीर विरोधाभास और कई महत्वपूर्ण खामियां थीं। अदालत ने माना कि घटनास्थल पर गवाहों की मौजूदगी भी संदेहास्पद प्रतीत होती है और प्रस्तुत साक्ष्य इतने विश्वसनीय नहीं हैं कि उनके आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जा सके। ऐसे में आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना न्यायसंगत है।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालतों और हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों की कमियों को नजरअंदाज करते हुए दोषसिद्धि कायम रखी, जो न्यायिक दृष्टि से गंभीर त्रुटि थी। अदालत ने कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह समय पर मिले, क्योंकि दशकों बाद मिलने वाला न्याय कई बार अपना वास्तविक महत्व खो देता है।

sajagkutch
Author: sajagkutch

Leave a Comment

और पढ़ें