प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार भूख हड़ताल और अनशन को अपनी आवाज़ बुलंद करने का माध्यम बनाया है। उनके अधिकांश आंदोलन शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़े रहे हैं।
1. लद्दाख को संवैधानिक संरक्षण की मांग (2023)
जनवरी 2023 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संरक्षण देने और स्थानीय लोगों के अधिकार सुरक्षित करने की मांग को लेकर पांच दिन का अनशन किया। इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता शुरू हुई, हालांकि मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
2. जलवायु और पर्यावरण संरक्षण के लिए 21 दिन का उपवास (2024)
मार्च 2024 में उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी और लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर 21 दिन का उपवास किया। इस आंदोलन को देश-विदेश में व्यापक समर्थन मिला और पर्यावरण संरक्षण तथा लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हुई।
3. ‘दिल्ली चलो’ अभियान और हिरासत (2024)
सितंबर 2024 में वांगचुक अपने समर्थकों के साथ लद्दाख की मांगों को लेकर दिल्ली की ओर मार्च कर रहे थे। रास्ते में उन्हें और उनके साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद उनके आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक समर्थन मिला तथा सरकार पर वार्ता का दबाव बढ़ा।
4. शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग (2026)
जून 2026 में उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
5. अनशन बना विरोध का प्रमुख माध्यम
सोनम वांगचुक ने हर बड़े जनहित के मुद्दे पर अहिंसक आंदोलन और भूख हड़ताल को अपना प्रमुख हथियार बनाया है। उनके आंदोलनों ने कई बार सरकार का ध्यान संबंधित मुद्दों की ओर आकर्षित किया, हालांकि अधिकांश मामलों में सभी मांगें पूरी नहीं हो सकीं। इसके बावजूद उनके शांतिपूर्ण विरोध ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा और जनसमर्थन हासिल किया।
