ट्रंप के इस फैसले से मच सकती है उथल-पुथल, 3 लाख से ज्यादा भारतीय छात्रों को अमेरिका छोड़कर भारत लौटने की आशंका

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा नियमों में किए जा रहे बड़े बदलावों ने भारतीय छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। H-1B वर्क वीज़ा की वर्षों पुरानी लॉटरी प्रणाली को खत्म कर अब अधिक कौशल और ज्यादा वेतन पाने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का फैसला किया गया है। इस नई नीति का सीधा असर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे और पढ़ाई के बाद वहीं नौकरी करने का सपना देख रहे 3 लाख से अधिक भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है।

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अनुसार यह नई व्यवस्था 27 फरवरी 2026 से लागू होगी। इसके तहत नियोक्ता अब नए ग्रेजुएट्स की बजाय अनुभवी और हाई-पेड विदेशी कर्मचारियों को तरजीह देंगे। इससे हाल ही में पढ़ाई पूरी करने वाले भारतीय छात्रों के लिए H-1B वीज़ा पाना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।

आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में करीब 3.63 लाख भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 76–78% STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) क्षेत्रों में हैं। हर साल दिए जाने वाले 85,000 H-1B वीज़ा में से केवल 20,000 वीज़ा विदेशी छात्रों के लिए आरक्षित होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद फ्रेश ग्रेजुएट्स की संभावनाएं घटेंगी और अगर उन्हें समय पर वीज़ा नहीं मिला तो बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों को मजबूरन भारत लौटना पड़ सकता है। यह फैसला न केवल छात्रों के करियर प्लान पर असर डालेगा, बल्कि अमेरिका की यूनिवर्सिटीज़ और टेक इंडस्ट्री के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

Sajag Kutch
Author: Sajag Kutch

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