प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को बच्चों में साहस और बलिदान की भावना जगाने के उद्देश्य से ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किया गया है। लेकिन छोटा उदेपुर जिले में इस राष्ट्रीय महत्व के दिन की गरिमा को बनाए रखने के बजाय कई स्कूलों में मनमाने ढंग से छुट्टी रखी गई। सिख गुरु गोविंद सिंह के साहिबज़ादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—के अद्वितीय बलिदान को याद करने के बजाय शिक्षकों ने कथित तौर पर स्थानीय त्योहार का बहाना बनाकर स्कूल बंद रखे, जिससे आम लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिली।
जांच में सामने आया कि कुछ शिक्षकों ने चार दिन के ‘मिनी वेकेशन’ के लिए शिक्षा विभाग से सामूहिक अवकाश की अनुमति ली, जबकि गांवों में किसी भी प्रकार के त्योहार का आयोजन नहीं था। जिस दिन स्कूलों में भाषण प्रतियोगिताएं, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और बच्चों को वीर साहिबज़ादों की शहादत से परिचित कराने की ज़रूरत थी, उसी दिन स्कूलों के गेट पर ताले लटके मिले।
इस पूरे मामले पर अधिकारियों का ढीला रवैया भी सवालों के घेरे में है। अब यह बहस तेज़ हो गई है कि क्या शिक्षकों की निजी छुट्टियां राष्ट्रीय महत्व के दिवसों से अधिक अहम हो गई हैं?
