गुजरात सरकार एक ओर ‘भणसे गुजरात, रमसे गुजरात’ जैसे बड़े नारों और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। नवसारी जिले के वांसदा तालुका में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां बालवाटिका, कक्षा 1 और कक्षा 2 के विद्यार्थियों को दूसरे सत्र की शुरुआत के एक महीने बाद भी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर वांसदा तालुका के सरपंचों ने एकजुट होकर प्रांत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। सरपंचों का आरोप है कि वांसदा तालुका पूरी तरह आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। केवल पाठ्यपुस्तकें ही नहीं, बल्कि छात्रवृत्ति और गणवेश सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं देने में भी प्रशासन विफल रहा है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि सरकार बालवाटिका के ‘प्रवेशोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों में फोटो सेशन और प्रचार में रुचि दिखाती है, लेकिन बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई देती। प्रशासन की इस उदासीनता का सीधा असर गरीब बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
सरपंचों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिक्षा नीति को सही ढंग से लागू कर बच्चों को किताबें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो वे गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद सोया हुआ तंत्र जागता है या नहीं।

