महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पवार परिवार की एकजुटता के संकेत मिल रहे हैं। पुणे नगर निगम (PMC) की आगामी चुनावों के लिए अजित पवार की NCP और शरद पवार की NCP (शरद पवार गुट) ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। हालांकि, इस गठबंधन से पार्टी के भीतर असंतोष भी उभर कर सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, 26 दिसंबर को दोनों गुटों के नेताओं के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अहम बैठक हुई थी। विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की नगर निगम चुनावों में गठबंधन पर सहमति बनी। लेकिन इसी फैसले से शरद पवार गुट के कद्दावर नेता और पुणे के पूर्व मेयर प्रशांत जगताप नाराज़ हो गए।
अजित पवार के साथ गठबंधन से असहमति जताते हुए प्रशांत जगताप ने NCP (शरद पवार गुट) से नाता तोड़कर मुंबई स्थित तिलक भवन में कांग्रेस का दामन थाम लिया। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई जातिवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ है और मौजूदा समय में केवल कांग्रेस ही भाजपा को टक्कर दे सकती है। उनके साथ NCP (शरद गुट) के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाले ने जगताप का स्वागत करते हुए कहा कि यह जुड़ाव वैचारिक आधार पर हुआ है और इससे आगामी 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी।
आगामी चुनावों को देखते हुए पवार परिवार की एकता जहां अजित पवार के लिए पुणे में पकड़ मजबूत करने का अवसर है, वहीं शरद पवार गुट के वफादार नेताओं का कांग्रेस में जाना गठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है।

