सूरत नगर निगम ने सेंट्रल ज़ोन क्षेत्र में वर्षों से यूनियन के अवैध कब्जे में रही एक और निगम संपत्ति को खाली कराकर अपने कब्जे में ले लिया है। साईं बाबा मंदिर के पास स्थित इस संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। चरणबद्ध तरीके से नोटिस देने के बावजूद संपत्ति खाली नहीं किए जाने पर नगर निगम ने आज सुबह कार्रवाई करते हुए परिसर का कब्जा हासिल कर लिया।
नगर निगम के सेंट्रल ज़ोन के वार्ड नंबर 12 में सर्वे नंबर 1107 की यह संपत्ति, जिसे ईश्वर नायक भवन के नाम से जाना जाता है, ग्राउंड फ्लोर और एक मंज़िल वाली इमारत है। इस संपत्ति का उपयोग सूरत सुधाराई कामदार (स्टाफ) मंडल द्वारा किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार यह संपत्ति वर्ष 1960 से 1965 के आसपास यूनियनों को लीज पर दी गई थी, लेकिन उसके बाद कभी भी लीज का नवीनीकरण नहीं कराया गया और न ही किसी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई।
तीन नोटिस के बाद भी नहीं खाली की संपत्ति
नगर निगम के अनुसार, लंबे समय से यूनियनों द्वारा निगम परिसरों का अवैध उपयोग किया जा रहा था। ऐसे कुल 11 परिसरों को नोटिस देकर खाली करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, यूनियनों ने संपत्ति खाली करने के बजाय वहां ताले लगा दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने पुलिस की मदद से रातोंरात कार्रवाई कर संपत्ति खाली करवाई और वहां निगम की विभिन्न शाखाओं की कार्यालयीन गतिविधियां भी शुरू कर दी गईं।
कोर्ट से नहीं मिली राहत
इस कार्रवाई के खिलाफ यूनियनों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसी दौरान सेंट्रल ज़ोन में स्थित एक और निगम संपत्ति के लंबे समय से बिना लीज नवीनीकरण के उपयोग में होने का मामला सामने आया।
नगर निगम ने मामले की जांच करवाई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि संपत्ति पर नियमों के खिलाफ कब्जा किया गया था। निगम ने संपत्ति खाली कराने के लिए तीन बार नोटिस जारी किए। अंतिम नोटिस दिए जाने के बाद आज सुबह निगम ने कार्रवाई करते हुए संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया।
नगर निगम की इस कार्रवाई को अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना लीज नवीनीकरण या वैध अनुमति के निगम संपत्तियों का उपयोग करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
