ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन बीते छह दिनों में हिंसक हो गया है और अब यह सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन की मांग में तब्दील होता दिख रहा है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी देकर हालात को और गंभीर बना दिया है।
ट्रंप की ‘लॉक एंड लोडेड’ चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा,
“अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हिंसा की गई या उन्हें मारा गया, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। हम पूरी तरह तैयार हैं—We are locked and loaded and ready to go।”
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सीधे हस्तक्षेप कर सकता है।
ईरान में बढ़ती हिंसा, कई प्रदर्शनकारियों की मौत
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के सुरक्षा बलों ने कई शहरों में प्रदर्शनकारियों पर सीधा फायरिंग की है।
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कुहदश्त में अमीरहेसम खोदायारीफर्द को सिर में गोली मारी गई।
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फूलादशहर में दारियुश अंसारी की राइफल से गोली मारकर हत्या कर दी गई।
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मर्वदश्त, अज़ना और लोरदेगान में भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की जान जाने की खबर है।
इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा दी हैं।
‘डैथ टू डिक्टेटर’ के नारों से गूंजा ईरान
प्रदर्शनकारी अब सड़कों पर उतरकर
‘डैथ टू डिक्टेटर’ और ‘मुल्ला देश छोड़ो’ जैसे तीखे नारे लगा रहे हैं। हालात पर काबू पाने के लिए ईरान सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी है, लेकिन जनता का गुस्सा कम होता नजर नहीं आ रहा।
ईरानी सरकार का सख्त रुख
ईरान का प्रशासन किसी भी तरह का नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं दिख रहा।
लोरिस्तान प्रांत के चीफ जस्टिस सईद शाहवारी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, अज़ना में पुलिस मुख्यालय पर हुए हमले में 3 लोगों की मौत और 17 के घायल होने की बात कही गई है।
अमेरिका ने ईरानी शासन को ठहराया जिम्मेदार
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह विरोध प्रदर्शन ईरान सरकार की नीतिगत विफलताओं के खिलाफ जनता का स्वाभाविक आक्रोश है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने दशकों तक अपनी अर्थव्यवस्था, कृषि और जल प्रबंधन जैसी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी कर अरबों डॉलर आतंकवादी गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रमों पर खर्च किए, जिसका खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है।
क्या बदलेगा ईरान का भविष्य?
मौजूदा हालात में ईरान आंतरिक विद्रोह और अंतरराष्ट्रीय दबाव—दोनों के बीच फंसा नजर आ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ेगा या फिर ईरानी शासन सख्ती के दम पर हालात पर काबू पा लेगा। आने वाले दिन मध्य-पूर्व की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
