भुज तालुका के कुकमा गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गुजरात हाईकोर्ट से रोक आदेश (स्टे ऑर्डर) मिलने के बावजूद एक दुकानदार की दुकान का हिस्सा तोड़े जाने के मामले में भुज तालुका विकास अधिकारी के खिलाफ ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ (अदालत की अवमानना) की कार्रवाई शुरू होने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुकमा गांव के निवासी सुलेमान जुसब ककल को ग्राम पंचायत द्वारा बस स्टैंड के सामने व्यवसाय के लिए भूमि आवंटित की गई थी। इस जमीन पर उन्होंने टायर–ट्यूब रिपेयर की दुकान बनाई थी। बाद में ग्राम पंचायत ने इस दुकान को लेकर नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट से मिला था रोक आदेश
पंचायत की नोटिस को चुनौती देते हुए सुलेमान ककल ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक आदेश जारी करते हुए दुकान पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इस आदेश की कानूनी नोटिस भुज तालुका विकास अधिकारी और कुकमा के तलाठी को विधिवत रूप से तामील भी कर दी गई थी।
स्टे के बावजूद तोड़ी गई दुकान
इसके बावजूद, आरोप है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा दुकानदार की दुकान का आगे का हिस्सा तोड़ दिया गया, जिससे उसे आर्थिक नुकसान हुआ। इसे अदालत के आदेश की सीधी अवहेलना मानते हुए पीड़ित पक्ष ने गुजरात हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की याचिका दायर की।
गैर-जमानती वारंट जारी
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने भुज तालुका विकास अधिकारी के खिलाफ 25,000 रुपये के गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और पंचायत विभाग में भारी हलचल देखी जा रही है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
