गिर क्षेत्र में एक अत्यंत करुण और दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है। विसावदर के नानी मोणपरी गांव में एक मासूम बच्चे को मारकर खाने वाली मानवभक्षी शेरनी को पकड़ने गई वन विभाग की टीम के साथ बड़ा हादसा हो गया। शेरनी को बेहोश करने के लिए छोड़ा गया एनेस्थीसिया इंजेक्शन गलती से वन विभाग के एक ट्रैकर को लग गया, जिससे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। माना जा रहा है कि गिर के इतिहास में यह इस तरह की पहली घटना है।
रविवार को विसावदर के नानी मोणपरी गांव में चार वर्षीय शिवम नामक बच्चे को शेरनी ने मार डाला था, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। इस मानवभक्षी शेरनी को पकड़ने के लिए वन विभाग ने युद्ध स्तर पर अभियान शुरू किया। शेरनी की लोकेशन मिलते ही उसे ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने के लिए गन से इंजेक्शन दागा गया।
लेकिन दुर्भाग्यवश यह इंजेक्शन शेरनी को लगने के बजाय मौके पर मौजूद वन विभाग के ट्रैकर अशरफभाई चौहान को लग गया। आमतौर पर शेर जैसे बड़े जंगली जानवर को बेहोश करने के लिए दी जाने वाली दवा की मात्रा बहुत अधिक होती है। इतनी भारी डोज शरीर में जाने से अशरफभाई की तबीयत तुरंत बिगड़ गई।
उन्हें तत्काल इलाज के लिए जूनागढ़ अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद सोमवार तड़के अशरफभाई ने दम तोड़ दिया। ड्यूटी के दौरान एक वनकर्मी की इस तरह आकस्मिक मौत से वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित पूरे स्टाफ में शोक की लहर फैल गई है।
