पड़ोसी देश चीन इस समय एक गंभीर जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रहा है। लगातार चौथे वर्ष चीन की जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में जन्म दर में भारी कमी देखी गई, जो एक दशक पहले की तुलना में लगभग एक करोड़ कम रही। विशेषज्ञ इस स्थिति के लिए चीन की दशकों पुरानी ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ को मुख्य कारण मान रहे हैं, जिसके प्रभाव अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में केवल 79.2 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जबकि 2024 में यह संख्या 95.4 लाख थी। यानी सिर्फ एक साल में जन्म दर में करीब 17 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1949 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद यह चीन का अब तक का सबसे कम जन्म दर है।
NBS के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में चीन की कुल जनसंख्या 33.9 लाख घटकर 1.4049 अरब रह गई, जबकि एक साल पहले यह 1.4083 अरब थी। 1959–1961 के भीषण अकाल को छोड़ दें, तो यह अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक जनसंख्या गिरावट है। इसी दौरान करीब 1.13 करोड़ लोगों की मौत दर्ज की गई, जो पिछले पांच दशकों में सबसे अधिक है।
चीन तेजी से बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी की समस्या से भी जूझ रहा है। 2024 के अंत तक देश में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या करीब 31 करोड़ तक पहुंच चुकी है। अनुमान है कि 2035 तक यह आंकड़ा 40 करोड़ से अधिक हो जाएगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक ढांचे पर भारी दबाव पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गंभीर संकट की जड़ें कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दशकों तक लागू की गई सख्त ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ में हैं। हालांकि इस नीति को 2016 में समाप्त कर दिया गया और 2021 में तीन बच्चों की अनुमति भी दी गई, लेकिन इसका अपेक्षित असर नहीं दिखा। बच्चों की परवरिश का बढ़ता खर्च, युवाओं में शादी से दूरी और जीवनशैली में बदलाव के कारण दंपती अधिक बच्चे पैदा करने से कतरा रहे हैं। वर्ष 2024 में शादियों की संख्या 1980 के बाद सबसे कम दर्ज की गई।
जन्म दर बढ़ाने के लिए चीनी सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें राष्ट्रीय शिशु देखभाल सब्सिडी योजना (प्रति बच्चे सालाना लगभग 1,534 डॉलर तक की सहायता) और गर्भनिरोधक साधनों पर टैक्स बढ़ाना शामिल है। इसके बावजूद अब तक ये उपाय प्रभावी साबित नहीं हो पाए हैं। मौजूदा आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि चीन को आने वाले वर्षों में और भी गंभीर जनसंख्या और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
