- सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी और व्यापक कानूनी सुरक्षा को लागू कराने के लिए केंद्र और राज्यों को निर्देश जारी करने की मांग की गई थी।
• बेंच ने कहा कि घरेलू सहायकों के शोषण को मान्यता देते हुए भी न्यायपालिका कानून बनाने या मौजूदा कानूनों में संशोधन का निर्देश नहीं दे सकती, क्योंकि यह विधायी अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप होगा। - सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घरेलू कामगारों की स्थिति को उजागर करने और हितधारकों के सामने उठाने का काम याचिकाकर्ताओं तथा संगठनों का होना चाहिए, ताकि राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा उपयुक्त समाधान पर विचार किया जा सके।
- अदालत ने यह भी नोट किया कि घरेलू कामगार पहले से ही कुछ वेलफेयर फ्रेमवर्क्स के तहत सुरक्षा पा रहे हैं, लेकिन एक समग्र विधेयक लाने का निर्णय विधायिका का क्षेत्र है।
सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू सहायकों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्यों को दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार किया
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