अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने चुनाव अभियान के दौरान “कोई नया युद्ध नहीं” शुरू करने का वादा किया था। लेकिन हाल के वर्षों में उनकी विदेश नीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार पिछले लगभग दो वर्षों में अमेरिका ने ट्रंप प्रशासन के दौरान कम से कम आठ देशों में सैन्य कार्रवाई या हवाई हमले किए हैं, जिससे उनकी नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार इन सैन्य अभियानों में मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों के कई देश शामिल रहे हैं। इन कार्रवाइयों में आतंकवादी ठिकानों, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया। हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये कार्रवाई “नए युद्ध” शुरू करने के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित खतरों को रोकने के लिए की गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में “सीमित सैन्य ऑपरेशन” की रणनीति अपनाई, जिसमें बड़े युद्ध की घोषणा किए बिना तेज और लक्षित हमले किए जाते हैं। इस नीति का उद्देश्य दुश्मन की क्षमता को कम करना और अमेरिका के हितों की रक्षा करना बताया गया।
हालांकि आलोचकों का तर्क है कि जब कई देशों में बार-बार सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो उसे “नए युद्ध से बचने” की नीति नहीं कहा जा सकता। उनका कहना है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
दूसरी ओर ट्रंप समर्थकों का कहना है कि उनके फैसलों ने अमेरिका की सैन्य शक्ति और वैश्विक प्रभाव को मजबूत किया है। उनका दावा है कि इन कार्रवाइयों के बावजूद बड़े पैमाने पर कोई नया वैश्विक युद्ध शुरू नहीं हुआ।
इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहस जारी है कि क्या ट्रंप की नीति वास्तव में शांति बनाए रखने की कोशिश है या फिर आक्रामक विदेश नीति का एक नया रूप।
