मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के असर अब भारत और खासकर गुजरात में भी दिखाई देने लगे हैं। इस स्थिति को देखते हुए गुजरात सरकार ने राज्य में घरेलू गैस आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया है, ताकि आम नागरिकों के घरों में गैस की कमी न हो।
राज्य के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि लोगों के घरों में खाना बनाने के लिए गैस की आपूर्ति बाधित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में राज्य के घरों के चूल्हे बंद नहीं होने दिए जाएंगे।
इस निर्णय के तहत उद्योगों को मिलने वाली गैस आपूर्ति में लगभग 50 प्रतिशत तक कटौती की गई है। वहीं उर्वरक कंपनियों और डेयरी उद्योगों में उपयोग होने वाली गैस की आपूर्ति में भी लगभग 40 प्रतिशत की कमी की गई है, ताकि घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध कराई जा सके।
सरकार ने यह भी कहा है कि फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति में कोई कटौती नहीं की गई है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि वैश्विक संकट के बावजूद राज्य में गैस की उपलब्धता बनी रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक गैस और ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है, जिसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ऐसे में घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने का यह फैसला आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होने तक ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते रहेंगे, ताकि राज्य में गैस की कमी की स्थिति न बने और आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
