वैज्ञानिकों ने मैग्नेटिक सेमीकंडक्टरों में हीट ट्रांसपोर्ट को समझने में सफलता प्राप्त की है, जो स्पिनट्रॉनिक्स, मैग्नेटिक मेमोरी और क्वांटम डिवाइसेज जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण पदार्थ हैं।
इस खोज से संघनित मैटर फिजिक्स में एक दशक पुरानी पहेली का समाधान हो गया है और उच्च-प्रदर्शन वाले इलेक्ट्रॉनिक और चुंबकीय प्रणालियों में उन्नत तापीय प्रबंधन के लिए नई संभावनाएं खुल गई हैं।
परंपरागत सेमीकंडक्टर में, तापमान बढ़ने पर ऊष्मीय चालकता घटती है, जिसका मुख्य कारण ऊष्मा संचारित करने वाले लैटिस वायब्रेशंस (जिन्हें फोनन कहा जाता है) की बढ़ी हुई स्कैटरिंग है। हालांकि, कई मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर इस नियम का उल्लंघन करते हैं और अपने मैग्नेटिक, ट्रांजिशन तापमान से ऊपर थर्मल चालकता में असामान्य वृद्धि प्रदर्शित करते हैं। क्रोमियम नाइट्राइड जो कोटिंग्स और इलेक्ट्रॉनिक अनुप्रयोगों में प्रयुक्त एक मैग्नेटिक सेमीकंडक्टर है, ऐसा ही एक पदार्थ है। अब तक, इस असामान्य ऊष्मीय व्यवहार का सूक्ष्म स्तर पर कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर), बेंगलुरु में प्रोफेसर बिवास साहा के नेतृत्व में एक शोध दल ने इस घटना के लिए जिम्मेदार अंतर्निहित तंत्र की पहचान करने वाले प्रत्यक्ष प्रायोगिक प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। अध्ययन से पता चलता है कि मैग्नेटिक सेमीकंडक्टरों में हीट ट्रांसपोर्ट को नियंत्रित करने में फोनोन और मैग्नेटिक स्पिन उतार-चढ़ाव के बीच मजबूत संयोजन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
