देश के सबसे बड़े मादक पदार्थ तस्करी मामलों में से एक मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई वर्ष 2021 में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन की खेप से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले की जांच के तहत की गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह ड्रग्स खेप विदेश से भारत लाई गई थी और इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस मामले को भारत में अब तक की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी में से एक माना जाता है। मामले की जांच के दौरान कई व्यक्तियों, कंपनियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पहचान की गई है।
ED की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य उन आर्थिक गतिविधियों और निवेशों का पता लगाना है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी से अर्जित धन को वैध बनाने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसियां बैंक खातों, संपत्तियों, कंपनियों के दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल ड्रग्स तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय था, जो विभिन्न देशों के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध धन के लेनदेन में शामिल था। जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात भी सामने आई है।
ED द्वारा की गई छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। एजेंसियों का कहना है कि इन साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस को राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही हैं ताकि तस्करी के स्रोत, वित्तीय चैनल और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा सके।
