भारत में 2026 के मानसून को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी जारी की है। एल-नीनो के प्रभाव के कारण इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का बेहद असंतुलित पैटर्न देखने को मिल सकता है। कहीं भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं, तो कहीं सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार मुंबई जैसे तटीय और शहरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा होने की संभावना है। इस असमान बारिश के कारण जल संकट और कृषि पर गंभीर असर पड़ सकता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और विशेषज्ञों के अनुसार 2026 का मानसून पिछले 11 वर्षों में सबसे कमजोर साबित हो सकता है। अनुमान है कि इस बार कुल वर्षा औसत से कम रह सकती है, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों, खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
एल-नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है जिसमें प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव के कारण वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होती है। इसका असर भारत के मानसून पर अक्सर देखने को मिलता है, जिससे बारिश का वितरण असमान हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर और असमान मानसून के कारण कुछ क्षेत्रों में बाढ़, जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखा और गर्मी की स्थिति बन सकती है। इससे न केवल कृषि उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि महंगाई और जल संकट की समस्या भी बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर 2026 का मानसून भारत के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें मौसम का असंतुलन देश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन दोनों पर गहरा असर डाल सकता है।
