मत्स्य विभाग गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने और एक्सेस पास एवं एलओए धारकों के साथ बातचीत पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन करेगा

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अधिक मूल्य वाले समुद्री संसाधनों के दोहन और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी, वित्तपोषण, कौशल विकास और बाजार संबंधों पर विशेष ध्यान दिया गया है

भारत सरकार का मत्स्य विभाग 17 सितंबर 2026 को गांधीनगर, गुजरात में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और एक्सेस पास एवं एलओए धारकों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य मछुआरों को अधिक मूल्य वाले मत्स्य संसाधनों का दोहन करने के लिए प्रोत्साहित कर गहरे समुद्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही जमीनी चुनौतियों को समझने और इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए हितधारकों के सुझाव प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार, गुजरात सरकार, अन्य सभी तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों, आईसीएआर, सिफनेट, नाबार्ड, एनसीईएल, एनसीडीसी, एसईएआई, एमपीईडीए, ईआईसी और अन्य मत्स्य पालन हितधारकों के साथ-साथ महिला मत्स्य पालन सहित मछुआरों की भी प्रत्यक्ष भागीदारी होगी।

भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। इसके साथ ही विभिन्न पहलों के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र के डिजिटलीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।

राष्ट्रीय कार्यशाला में गहन तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को शामिल किया जाएगा। इन सत्रों में संसाधन क्षमता, पोत आधुनिकीकरण, कौशल विकास, वित्तपोषण, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और निर्यात बाजारों तक पहुंच जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा। कार्यशाला चर्चाओं में भारत के ईईजेड और खुले समुद्रों में अधिक मूल्य वाले मत्स्य संसाधनों के दोहन के अवसरों, मछली पकड़ने की आधुनिक तकनीकों और बेहतर वैश्विक विधियों को अपनाने, मछुआरों और उनके दल के लिए क्षमता निर्माण, संस्थागत वित्त और सहकारी नेतृत्व वाले निवेश मॉडलों तक पहुंच और मछली पकड़ने के बाद के प्रबंधन, पता लगाने की क्षमता, मूल्यवर्धन और निर्यात अनुपालन प्रणालियों को मजबूत करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रत्येक सत्र में विशेषज्ञ प्रस्तुतियां, मछुआरों या उद्योग के दृष्टिकोण और हितधारकों के साथ चर्चा शामिल होगी, जिससे प्रतिभागियों को भारत में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध अवसरों, चुनौतियों और सहायता तंत्रों की व्यावहारिक जानकारी और व्यापक समझ प्राप्त होगी।

यह कार्यशाला नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत के हितधारकों, सहकारी समितियों और मछुआरों को एक साथ लाकर भारत के गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगी। कार्यशाला के बाद सामने आने वाली सिफारिशें जमीनी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने, प्रौद्योगिकी, कौशल, वित्त और बाजारों तक पहुंच में सुधार करने और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने में मछुआरों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने में सहायक होंगी।

पृष्ठभूमि

भारत विशाल और विविध समुद्री संसाधन भंडार से संपन्न है, जिसे लगभग 11,099 किलोमीटर की तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजे) का समर्थन प्राप्त है। भारत के ईईजे के भीतर समुद्री मत्स्य पालन की क्षमता 58.6 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है और खाद्य सुरक्षा, पोषण, रोजगार, आय सृजन और निर्यात राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारत वर्तमान में विश्व स्तर पर अग्रणी मत्स्य पालन और जलीय कृषि उत्पादक देशों में से एक है और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 73,890 करोड़ रुपये मूल्य का समुद्री उत्‍पादों का निर्यात किया।

अधिकांश मत्स्य पालन गतिविधियाँ तट से 40-50 समुद्री मील के भीतर केंद्रित हैं, जबकि गहरे जल और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे के क्षेत्र अधिक मूल्य वाली प्रजातियों, विशेष रूप से टूना और टूना जैसी प्रजातियों के दोहन के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं। सतत समुद्री मत्स्य पालन के रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए, भारत सरकार ने भारतीय ध्वज वाले मत्स्य जहाजों द्वारा मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) नियम, 2025 और उच्च समुद्र दिशानिर्देश, 2025 सहित सहायक ढांचा अधिसूचित किया है।

भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास एक निःशुल्क डिजिटल पास है, जो रियलक्राफ्ट (ReALCRaft) पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मछुआरों, सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को ईईजेड (12 से 200 समुद्री मील) में मछली पकड़ने के लिए सशक्त बनाना और समुद्री मत्स्य संसाधनों की स्थिरता सुनिश्चित करना है। यह एक्सेस पास भारत सरकार द्वारा 4 नवंबर 2025 को अधिसूचित विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी नियम, 2025 के तहत जारी किया जाता है। मशीनीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों और 24 मीटर से अधिक लंबाई वाली बड़ी मोटर चालित नौकाओं के लिए एक्सेस पास अनिवार्य है, जबकि स्थानीय आजीविका की रक्षा के लिए पारंपरिक गैर-मोटर चालित और छोटे कारीगरों को इससे पूरी तरह छूट दी गई है। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य पारंपरिक और छोटे मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को मछली पकड़ने के कार्यों का विस्तार करने, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के माध्यम से अप्रयुक्त संसाधनों का दोहन करने और प्रसंस्करण और निर्यात के माध्यम से आय के नए स्रोत प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाना है, ताकि उनकी आजीविका में सुधार हो सके। ईईजेड नियमों के अनुसार, भारत के ईईजेड में 12 समुद्री मील से आगे मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास आवश्यक है। अब तक तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर कुल 9,650 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं।

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Author: sajagkutch

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