प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसमें नारियल के वृक्षों और परोपकारी व्यक्तियों के बीच समानता का भाव को दर्शाते हुए आजीवन कृतज्ञता और निस्वार्थ सेवा के गुणों का उल्लेख किया गया है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा :
“प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्।
ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥”
जैसे नारियल का वृक्ष जीवनभर उस थोड़े से जल को संजोए रखता है जो उसे आरंभ में मिला था और अपने ऊपर भारी बोझ उठाते हुए भी मानवजाति को मीठा जल प्रदान करता है, उसी प्रकार सत्यनिष्ठ परोपकारी व्यक्ति, विशेषकर बलिदान देने वाली महान व्यक्तित्वों के प्रति श्रद्धा रखते हुए, उनके उपकार को कभी नहीं भूलते। उनके बलिदान, तपस्या और समर्पण के प्रति गहरी कृतज्ञता रखते हुए, वे अपने जीवन को उनके आदर्शों के अनुरूप ढालते हैं और अपने कार्यों एवं समर्पित सेवा भाव से उस परोपकार के लिए सदा कृतज्ञ रहते हैं।
