‘2 लाख देकर बच नहीं सकते, माफी मांगनी होगी…’ इंदौर जल त्रासदी पर उमा भारती ने भाजपा सरकार को घेरा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस मामले को लेकर अपनी ही पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इस घटना को सरकार और पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए शर्मनाक और कलंकित करने वाला बताया है।

सबसे स्वच्छ शहर में जहरीला पानी कैसे पहुंचा?

उमा भारती ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि वर्ष 2025 के अंत में इंदौर जैसे देश के सबसे स्वच्छ शहर में गंदे और जहरीले पानी से लोगों की मौत होना बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि,
“देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर में इतना गंदा और जहरीला पानी आखिर आया कहां से? इस पानी ने कई निर्दोष लोगों की जान ले ली है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। यह हमारी सरकार और व्यवस्था पर एक बदनुमा दाग है।”

2 लाख रुपये का मुआवजा बताया अपमानजनक

राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले 2 लाख रुपये के मुआवजे पर भी उमा भारती ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी इंसान की जान की कीमत इतनी कम नहीं हो सकती।
उमा भारती ने लिखा,
“कोई सरकार यह न समझे कि 2 लाख रुपये देकर वह अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगी। पीड़ित परिवार पूरी जिंदगी इस दर्द के साथ जिएगा। इस पाप का प्रायश्चित जरूरी है और सरकार को पीड़ितों से माफी मांगनी चाहिए।”

जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस लापरवाही में जो भी लोग शामिल हैं—चाहे वे निचले स्तर के कर्मचारी हों या ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी—सभी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी निशाना

उमा भारती ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह समय मुख्यमंत्री के नेतृत्व की परीक्षा का है।
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा,
“जब हालात इतने गंभीर थे, तब आप पद पर बैठे-बैठे बोतलबंद पानी क्यों पीते रहे? आपने पद छोड़कर जनता के बीच जाकर उनकी पीड़ा क्यों नहीं समझी? ऐसे पापों का या तो प्रायश्चित होता है या फिर दंड।”

इंदौर जल संकट और उससे हुई मौतों के बाद उमा भारती का यह बयान न केवल सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही को लेकर भी एक बड़ी बहस छेड़ रहा है।

sajagkutch
Author: sajagkutch

Leave a Comment

और पढ़ें