ट्रंप का बड़ा झटका: गाजा शांति सेना (ISF) में पाकिस्तान को नहीं शामिल किया गया 🇺🇸🇵🇰

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वाशिंगटन में डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली ऐतिहासिक बैठक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पुनर्निर्माण और शांति योजना का एलान किया। इस बैठक में दुनिया भर के कई देशों ने हिस्सा लिया और गाज़ा में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (International Stabilisation Force – ISF) बनाने का प्रस्ताव रखा गया।

🔹 ISF के लिए देशों की भागीदारी:

सबसे बड़ा योगदान इंडोनेशिया ने दिया — लगभग 8,000 सैनिक भेजने की घोषणा।

इसके अलावा मोरोक्को, अल्बानिया, कज़ाकिस्तान और कोसोवो ने भी अपनी सैन्य और पुलिस बल भेजने की सहमति दी।

🔹 पाकिस्तान को शामिल न करने का कारण: हालाँकि पाकिस्तान शांति सेना में अपना योगदान देने की उम्मीद रखता था, इस बार ISF में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं किया गया, जिसे उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसा मुख्यत: पाकिस्तान के हमास के निष्क्रियकरण (डिसआर्मामेंट) के बारे में अस्पष्ट रुख के कारण माना जा रहा है।

🔹 हमास का मुद्दा और सुरक्षा व्यवस्था: शांति योजना के अगले चरण में ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि हमास को शांत तरीके से हथियारों से मुक्त (निष्क्रिय) करना जरूरी है, लेकिन ट्रंप ने कहा है कि वह आशा करते हैं कि यह “शांति से होगा”। दूसरी ओर, यदि हमास स्वयं हथियार नहीं छोड़ता है, तो बल प्रयोग की भी संभावना जताई जा सकती है। इस सबके बीच गाज़ा में एक नई ‘पोस्ट-हमास पुलिस फोर्स’ के गठन की भी तैयारी चल रही है।

🔹 पाकिस्तानी पीएम की बेइज्जती का भी जिक्र: रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि एक मौके पर जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकने का दावा दोहराया, तो उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को सभा में खड़ा होने का निर्देश दिया, और इस दौरान उनके आसन्न व्यवहार को गोपनीय रूप से स्पष्ट किया गया।

🔹 गाजा पुनर्निर्माण और सहायता: गाज़ा के पुनर्निर्माण के लिए विश्व स्तर पर समर्थन जारी है, जिसमें खाड़ी देशों समेत अन्य देशों से भी आर्थिक योगदान मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहयोग कार्यक्रमों के तहत भी अरब देशों की ओर से अरबों डॉलर की सहायता की घोषणा की जा चुकी है।

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Author: sajagkutch

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