उद्धव-राज ठाकरे विवाद: BMC मनोनीत पार्षदों के मसले पर उद्धव ठाकरे ने लिया बड़ा फैसला

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महाराष्ट्र की सियासत में बीते दिनों ‘ठाकरे बंधुओं’ (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) के बीच चल रही राजनीतिक चर्चाओं में एक नया मोड़ आ गया है।

बीते बुधवार को Raj Thackeray और **महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री **Eknath Shinde ने मुंबई में एक बैठक की थी। यह पहला मौका था जब राज ठाकरे और शिंदे के बीच चुनाव के बाद आमने-सामने बातचीत हुई थी, जिससे राज्य की राजनीतिक हलचल फिर से तेज हो गई है।

राज ठाकरे की यह मीटिंग बीएमसी चुनाव के बाद हुई थी, जिसमें उनकी पार्टी Maharashtra Navnirman Sena ने Shiv Sena (UBT) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि चुनाव में दोनों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी और बीजेपी गठबंधन ने मुख्य रूप से जीत हासिल की थी।

मीटिंग के बाद Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। उद्धव ठाकरे ने बीएमसी में नामांकित पार्षदों के नामों को मंजूरी दी है, जिनमें साईनाथ दुर्गे, माधुरी मांजरेकर और कैलाश पाठक शामिल हैं। यह निर्णय राज ठाकरे और शिंदे की बैठक के तुरंत बाद लिया गया माना जा रहा है।

लेकिन इस फैसले के पीछे राजनीति कुछ जटिल रूप ले रही है:

राज ठाकरे ने उम्मीद जताई थी कि बीएमसी में मिलने वाली नामांकित पार्षद सीटों में से एक को उनके पार्टी MNS के हिस्से में रखा जाए, लेकिन उद्धव ठाकरे द्वारा तीनों नाम अलग-अलग चुनकर यह उम्मीद अधूरी रह गई है।

इस फैसले को राजनीतिक गलियारों में ठाकरे बंधुओं के बीच मतभेद की शुरुआत बताकर देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय में उद्धव-राज के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत और समर्थन-विरुद्ध भाषणों का माहौल था।

बीएमसी चुनाव 2026 में भाजपा गठबंधन ने 89 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना (UBT) को 65 और MNS को मात्र 6 सीटें मिलीं, जिससे प्रमुख गठबंधन में सत्ता हासिल करने में उद्धव-राज की युति असफल रही थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक और निर्णय के बाद महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार की दीर्घकालीन राजनीतिक रणनीति पर प्रश्नचिन्ह उठ सकता है, खासकर जब दोनों पक्षों के बीच पहले भी मतभेद रहे हैं।

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Author: sajagkutch

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