अमेरिका में काम करने के सपने देखने वाले भारतीय युवाओं और टेक कंपनियों के लिए बड़ी खबर है। अमेरिकी फेडरल जज ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्णय को वैध करार दिया है, जिसमें H-1B वीजा शुल्क को $1,00,000 तक बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। इस फैसले से अमेरिकी टेक कंपनियों में भारी चिंता का माहौल है।
जज बरेल हॉवेल के अनुसार, ट्रंप को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के चलते वीजा शुल्क बढ़ाने का कानूनी अधिकार है। H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है।
भारतीय पेशेवरों पर सबसे बड़ा असर पड़ेगा क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा धारकों में लगभग 70% भारतीय हैं। शुल्क वृद्धि और नई प्राथमिकता प्रणाली के कारण अमेरिकी कंपनियां भारतीय इंजीनियरों को नियुक्त करने में हिचकिचा सकती हैं, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों दोनों को भारी झटका लगेगा। यह नियम संभवतः 27 फरवरी, 2026 से लागू होंगे।

