गुजरात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश पंचाल द्वारा घोषित नई प्रदेश टीम के बाद पार्टी के भीतर चर्चाओं और असंतोष का दौर शुरू हो गया है। इस बार भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को दरकिनार करते हुए कई मौजूदा सांसदों और विधायकों को प्रदेश संगठन में अहम पद सौंपे गए हैं। इससे सत्ता और संगठन के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
नई टीम की घोषणा से पहले कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा दिल्ली तक लॉबिंग की चर्चा थी, लेकिन अंतिम सूची में कई चर्चित और कद्दावर नामों को जगह नहीं मिली। इससे पार्टी के अंदरूनी राजनीतिक समीकरण भी बदलते नजर आ रहे हैं। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में यह चर्चा है कि यदि अधिकांश पद निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही मिलेंगे, तो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को अवसर कब मिलेगा।
हालांकि विवादों के बीच भाजपा ने विभिन्न मोर्चों—किसान, युवा, महिला और अल्पसंख्यक मोर्चा—में नए चेहरों को शामिल कर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। महिलाओं को भी संगठन में अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिनिधित्व दिया गया है। अब यह नई टीम आगामी स्थानीय स्वराज्य चुनावों में कितना प्रभावी प्रदर्शन करती है, उसी से इस रणनीति की असली परीक्षा मानी जा रही है।

